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‘सेवा तीर्थ’ से ‘जिताओ आयोग’ तक—नामकरण की लहर पर राकेश कायस्थ का चुटीला व्यंग्य,

Priyanshu Ranjan

नाम बदलेंगे तभी देश बदलेगा

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संसद का नया सत्र शुरू होते ही प्रधानमंत्री ने विपक्ष को डांट लगाई—ड्रामा नहीं डिलिवरी चाहिए।

इसके अगले ही दिन मोदीजी ने अपने मनसा वाचा और कर्मणा के एक होने का प्रमाण देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम बदलकर `सेवा तीर्थ’ कर दिया। प्रधानमंत्री यह नाम तय नहीं करते तब भी हम जैसे लोग उनके कार्यालय को तीर्थ ही मानते। जो स्थान उनके जैसे अजैविक अवतारी का है, वह तीर्थ नहीं तो और क्या होगा?

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लेकिन नाम बदलकर प्रधानमंत्री ने देश को यह संदेश दिया कि व्यक्ति को हर मामले में आत्मनिर्भर होना चाहिए, मामला भले ही प्रशंसा का ही क्यों ना हो।

बहुत से देशवासियों का मानना है कि उन्हें कदम-कदम पर सेवा शुल्क चुकाना पड़ता है। अच्छा हो अगर एकल खिड़की प्रणाली लागू करते हुए कलेक्शन सेंटर एक ही जगह कर दिया जाये। एक देश एक तीर्थ का कांसेप्ट ज्यादा सही रहेगा।

वैसे मुझे ज्यादा बड़ा फैसला लाट साहब यानी राज्यपाल के निवास स्थान राजभवन का नाम परिवर्तित करके लोकभवन करना लगा। इससे राज्यापाल स्वत: लोकपाल हो गया और अन्ना हजारे के व्यथित आत्मा को अंतत: शांति पहुंची।

नाम बदलना इसलिए जरूरी है क्योंकि नाम अच्छा होगा तभी परिणाम अच्छा होगा। इस आधार पर केंद्र, राज्य सरकार और पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों के नाम परिवर्तन के कुछ सुझाव दे रहा हूं। आप सबसे अनुरोध है, अपने सुझाव जोड़ते जायें ताकि महामानव की विहंगम दृष्टि को अमली जामा पहनाने में मदद मिले–

1. यूपी के ठांय-ठांय मिशन यानी प्रोजेक्ट एनकाउंटर का नाम मुख्यमंत्री मोक्ष योजना रखा जाना चाहिए। टांग में गोली मारने की योजना का नाम मुख्यमंत्री पद प्रक्षालन योजना होना चाहिए।

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2. प्रवर्तन निदेशायल का नाम ह्रदय परिवर्तन निदेशालय होना चाहिए ताकि जिसके यहां ईडी जाये उसका शर्तिया ह्रदय परिवर्तन हो जाये और अजित पवार की तरह तुरंत गंगा नहा ले।

3. चुनाव आयोग का नाम जिताओ आयोग होना चाहिए क्योंकि हर सफल चुनाव के बाद अंतत: जीतता लोकतंत्र ही है।

4. विधायक खरीद योजना का नाम स्थिर विकास परियोजना होना चाहिए। विधायक खरीद लिये जाते हैं, तो राजनीतिक स्थिरता आ जाती है और गरीब जनता के माथे पर बार-बार चुनाव का खर्चा नहीं चढ़ता है।

5. बिहार की समस्त नये पुलों की एकीकृत परियोजना का नाम आत्महत्या जागरूकता योजना रखा जाना चाहिए। बिहार के पुल नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या का डेमो देते हैं और नागरिकों को बताते हैं कि इस तरह कूदे तो पानी में डूबकर आप मर भी सकते हैं।

6. इंस्टेंट एफआईआर प्लान वैसे तो अपने आप में अच्छा नाम है लेकिन गरीबों की सुविधा के लिए बदलकर बाय वन गेट वन प्लान कर दिया जाना चाहिए। मतलब अगर किसी विपक्षी नेता के नाम से एफआईआर दर्ज करवाओगे तो साथ-साथ बकरी या साईकिल चोरी की एफआईआर भी निशुल्क दर्ज कर ली जाएगी।

7. देशभर के सभी थानों का नाम एक ही होना चाहिए—भौतिक व दैहिक ताप हरण केंद्र

8. देश की सभी चुंगियों का नाम कुबेरधाम होना चाहिए।

9. मस्जिद के सामने फुल डीजे डांस वाली योजना का नाम कॉमन वेल्थ टैलेंट हंट रखा जाना चाहिए। सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं का चयन करके उन्हें 2030 में अहमदाबाद में होनेवाले कॉमनवेल्थ गेम की ओपनिंग सेरेमनी में नचवाया जाना चाहिए।

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सुझाव और भी बहुत हैं। लेकिन जिस तरह एक अकेले मोदीजी क्या-क्या करेंगे उसी तरह एक अकेला उनका ये भक्त राकेश कायस्थ भी क्या क्या करेगा। थोड़ी मेहनत आपलोग भी कीजिये ताकि मोदीजी को ये ना कहना पड़े कि लगता तपस्या में कोई कमी रह गई थी।

यह व्यंग्य वरिष्ठ पत्रकार राकेश कायस्थ जी के फेसबुक वॉल से साभार है।

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