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पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित केते एक्सटेंशन कोल परियोजना को मिली मंजूरी पर केंद्र और राज्य सरकार की मंशा पर खड़े किए गंभीर सवाल ,

Priyanshu Ranjan

अंबिकापुर । पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित केते एक्सटेंशन कोल परियोजना को मिली मंजूरी पर केंद्र और राज्य सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अडानी के एमडीओ वाली एक और कोल परियोजना को आखिरकार केंद्र सरकार ने स्वीकृति दे दी है, जबकि यह पूरा मामला पर्यावरण, ऐतिहासिक धरोहर और जनभावनाओं से जुड़ा हुआ है।

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टीएस सिंह देव ने कहा कि राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित इस कोल खदान परियोजना का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा हसदेव अरण्य के संरक्षित एवं आरक्षित घने वन क्षेत्र में आता है। परियोजना से करीब 1742.6 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी और लगभग 7 लाख पेड़ों की कटाई की आशंका है। उन्होंने कहा कि यह केवल जंगलों का विनाश नहीं, बल्कि सरगुजा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान पर भी बड़ा खतरा है।

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रामगढ़ पहाड़ और मंदिर के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना सरगुजा के ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ से लगी हुई है और खदान की हवाई दूरी रामगढ़ के मुख्य मंदिर से महज 8 किलोमीटर है। उन्होंने दावा किया कि पहले से संचालित अन्य कोल परियोजनाओं के कारण रामगढ़ क्षेत्र में चट्टानों के टूटने, पहाड़ों में दरार आने और भू-स्खलन जैसी स्थितियां लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में केते एक्सटेंशन परियोजना को मंजूरी मिलना रामगढ़ पहाड़ और वहां स्थित धार्मिक स्थलों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा पैदा करता है। टीएस सिंह देव ने कहा कि यदि भविष्य में रामगढ़ पहाड़ प्रभावित होता है, मंदिरों को नुकसान पहुंचता है या वहां तक पहुंचने का मार्ग बाधित होता है, तो इसकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय वन सलाहकार समिति, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वन मंत्री केदार कश्यप और स्थानीय विधायक एवं मंत्री राजेश अग्रवाल की होगी।

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विधानसभा के सर्वसम्मत प्रस्ताव की दिलाई याद…

उन्होंने कहा कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया था कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में आगे किसी भी नई कोल परियोजना को अनुमति नहीं दी जाएगी। इस प्रस्ताव को सभी दलों के विधायकों ने समर्थन दिया था। इसके अलावा जुलाई 2023 में सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार की ओर से शपथ पत्र प्रस्तुत कर कहा गया था कि हसदेव क्षेत्र में नई कोल खदानें आवश्यक नहीं हैं। टीएस सिंह देव ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद वर्तमान भाजपा सरकार और केंद्र सरकार द्वारा

केते एक्सटेंशन को मंजूरी देना विधानसभा के प्रस्ताव और पूर्व में दिए गए आश्वासनों के विपरीत है।

जनहित नहीं,निजी कंपनी के लाभ के लिए हो रहा काम

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान उन्होंने और उनकी पार्टी ने संवैधानिक तरीकों से हसदेव अरण्य को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा भाजपा सरकार अब खुद विधानसभा में पारित प्रस्ताव को ही नकार रही है। उन्होंने कहा कि केते एक्सटेंशन परियोजना केवल लाखों पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रामगढ़ पहाड़ और वहां स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों के अस्तित्व को भी समाप्त कर सकती है। सरकार की कार्यप्रणाली पूरी तरह एक निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने वाली दिखाई दे रही है, जबकि जनहित और पर्यावरण संरक्षण को नजरअंदाज किया जा रहा है।

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