शाहीन खान और नफीसा खान ने लगाया हिरासत में लेकर मारपीट का आरोप, दिल्ली पुलिस ने दावों को बताया भ्रामक और निराधार,
सूरजपुर। दिल्ली के साकेत इलाके में दो महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और हिरासत में लिए जाने का मामला चर्चा में है। PM News Network से जुड़ी पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान ने आरोप लगाया है कि एक कार्यक्रम की रिपोर्टिंग के दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर साकेत थाने पहुंचाया, जहां उनके साथ मारपीट की गई। पत्रकारों ने धार्मिक पहचान पूछे जाने के बाद कथित दुर्व्यवहार बढ़ने का भी आरोप लगाया है।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत, भ्रामक और निराधार बताते हुए खारिज किया है। ऐसे में पूरे मामले को लेकर आरोप और पुलिस के पक्ष के बीच निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
इस मामले पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (अल्पसंख्यक विभाग) के प्रदेश महासचिव अफरोज खान ने कड़ा विरोध जताते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह केवल दो पत्रकारों से जुड़ा मामला नहीं होगा, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता, नागरिक अधिकार और कानून के शासन से जुड़ा गंभीर सवाल होगा।
‘पत्रकारों का काम सवाल पूछना है’
अफरोज खान ने कहा कि पत्रकार किसी कार्यक्रम में खबर जुटाने और सवाल पूछने के लिए जाते हैं। सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करना पत्रकारिता का मूल दायित्व है। यदि किसी पत्रकार को सवाल पूछने के कारण प्रताड़ित किया जाता है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि दोनों महिला पत्रकारों को कार्यक्रम स्थल से हिरासत में लेकर साकेत थाने ले जाया गया और वहां कथित तौर पर उनके साथ मारपीट हुई। उन्होंने कहा कि पुलिस का दायित्व नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
धार्मिक पहचान के आधार पर दुर्व्यवहार का आरोप
मामले का गंभीर पहलू पत्रकार शाहीन खान का यह आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनकी धार्मिक पहचान के बारे में पूछा और मुस्लिम होने की जानकारी मिलने के बाद कथित मारपीट बढ़ गई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दोनों पत्रकार अपने शरीर पर चोट के निशान दिखाती नजर आईं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
अफरोज खान ने कहा कि यदि जांच में धर्म के आधार पर दुर्व्यवहार या हिंसा के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह बेहद गंभीर मामला होगा। उन्होंने कहा कि किसी नागरिक को उसकी जाति, धर्म या पहचान के आधार पर भेदभाव का सामना नहीं करना चाहिए।
दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग
अफरोज खान ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जाए। यदि जांच में कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछने का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए। पत्रकारों को सवाल पूछने से रोकना या उनके साथ कथित हिंसा करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि दोषी कोई भी हो, कार्रवाई तथ्यों और कानून के आधार पर होनी चाहिए।
दिल्ली पुलिस ने बताया अलग घटनाक्रम
वहीं, दिल्ली पुलिस के अनुसार दोनों महिलाओं ने कार्यक्रम स्थल के पास निर्धारित वीवीआईपी मार्ग पर स्कूटी खड़ी कर रास्ता बाधित किया था। पुलिस का कहना है कि बार-बार कहने के बावजूद वाहन नहीं हटाया गया, जिसके बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत दोनों को आगे की पूछताछ के लिए स्थानीय थाने ले जाया गया।
पुलिस ने मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के कारण मारपीट किए जाने के आरोपों को भी तथ्यात्मक रूप से गलत और निराधार बताया है।
ऐसे में मामले में दोनों पक्षों के दावों के बीच निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। अफरोज खान ने पुलिस से पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है। उनका कहना है कि पुलिस की निष्पक्षता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर जनता का भरोसा कायम रहना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।




