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रतलाम में भ्रष्ट अधिकारियो को चार चार साल के कठोर कारावास की सजा : जावरा नपा की पूर्व सीएमओ नीता जैन और सहायक राजस्व निरीक्षक विजय सिंह शक्तावत भ्रष्टाचार के मामले में दोषसिद्ध,दो दो हज़ार रु के अर्थदंड से दण्डित

Priyanshu Ranjan

भरत शर्मा की रिपोर्ट

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भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश संजीव कटारे का फैसला,रिश्वत लेते रंगे हाथो धराया था विजय सिंह

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रतलाम, 19 फरवरी भ्रष्टाचार के एक महत्वपूर्ण मामले में विशेष न्यायालय रतलाम ने जावरा नगर पालिका परिषद के तत्कालीन अधिकारियों को कठोर दंड सुनाया है। जिला न्यायलय में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश संजीव कटारे ने तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्रीमती नीता जैन और सहायक राजस्व निरीक्षक विजय सिंह शक्तावत को दोषी ठहराते हुए 4-4 वर्ष के सश्रम कारावास एवं कुल 2,000-2,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। सजा के बाद दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।

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3 प्रतिशत कमीशन की मांग से खुला मामला

प्रकरण के अनुसार, जावरा निवासी ठेकेदार पवन भावसार ने 9 मार्च 2021 को लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि नगर पालिका परिषद जावरा में किए गए निर्माण कार्यों—पेवर ब्लॉक फ्लोरिंग, आरसीसी नाली निर्माण और आरसीसी रोड निर्माण—के भुगतान व एफडीआर राशि जारी करने के बदले तत्कालीन सीएमओ द्वारा कुल राशि का 3 प्रतिशत (करीब 42,000 रुपये) रिश्वत की मांग की गई।

शिकायत की पुष्टि के लिए लोकायुक्त टीम ने गोपनीय रूप से बातचीत रिकॉर्ड कराई। जांच में सामने आया कि सीएमओ ने सहायक राजस्व निरीक्षक के माध्यम से 20,000 रुपये की रिश्वत तय करवाई। बाद में 15,000 रुपये तत्काल और शेष 5,000 रुपये काम होने के बाद देने की बात तय हुई।

ट्रैप कार्रवाई में 18,500 रुपये के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार

12 मार्च 2021 को लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने नगर पालिका परिषद जावरा कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई की। शिकायतकर्ता से 18,500 रुपये लेते हुए सहायक राजस्व निरीक्षक विजय सिंह शक्तावत को रंगे हाथ पकड़ा गया। रासायनिक परीक्षण में फिनाफ्थलीन पाउडर की पुष्टि हुई और जब्त किए गए नोटों के नंबर भी पूर्व निर्धारित सूची से मेल खाए।

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जांच पूर्ण होने के बाद विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त, उज्जैन ने 21 जून 2023 को विशेष न्यायालय रतलाम में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। विचारण उपरांत न्यायालय ने दोनों आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी के तहत दोषसिद्ध पाया।

शासन की ओर से प्रभावी पैरवी

प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक कृष्णकांत चौहान ने पैरवी की। प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन/सहायक निदेशक अभियोजन, जिला रतलाम श्रीमती आशा शाक्यवार ने बताया कि न्यायालय का यह निर्णय भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त संदेश है।

यह फैसला सार्वजनिक पदों पर आसीन अधिकारियों के लिए स्पष्ट संकेत है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कानून सख्ती से कार्रवाई करेगा।

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