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अंबिकापुर के बीच शहर में बारूद का कारोबार! 23 अप्रैल के अग्निकांड से भी नहीं लिया सबक, अब पटाखा दुकानों को बाहर शिफ्ट करने की मांग

Priyanshu Ranjan

पेट्रोल पंपों और घनी आबादी के बीच पटाखों की दुकानें व गोदाम, नागरिकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल; प्रशासन के पुराने आदेशों का पालन हुआ या नहीं?

अंबिकापुर। शहर के घनी आबादी वाले इलाकों और व्यस्त बाजारों के बीच संचालित पटाखा दुकानों एवं गोदामों को लेकर एक बार फिर सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है। बिलासपुर रोड पर पेट्रोल पंप के आसपास, महामाया रोड की संकरी गलियों और पुराने बस स्टैंड के आसपास ऐसे प्रतिष्ठानों की मौजूदगी को लेकर नागरिकों में चिंता है। लोगों की मांग है कि शहर के बीच संचालित पटाखा दुकानों और थोक गोदामों को आबादी से दूर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए।

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23 अप्रैल के अग्निकांड की याद अभी ताजा

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अंबिकापुर के ब्रह्मपारा स्थित राम मंदिर रोड पर 23 अप्रैल 2026 को मुकेश प्लास्टिक एवं पटाखा दुकान में भीषण आग लग गई थी। आग के दौरान पटाखों में हुए धमाकों से आसपास के मकानों तक खतरा पहुंच गया था। इस घटना में करीब आठ मकान प्रभावित हुए थे। कई दमकल वाहनों की मदद से आग पर काबू पाया गया। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई।

घटना के बाद तत्कालीन कलेक्टर अजीत वसंत ने शहर के पटाखा गोदामों को बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही एसडीएम को पटाखा प्रतिष्ठानों के लाइसेंस, भंडारण और अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर सात दिनों में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था।

जांच और कार्रवाई पर आज भी सवाल

अग्निकांड के बाद पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर भी सवाल उठे थे। तत्कालीन सरगुजा रेंज आईजी दीपक कुमार झा ने विस्फोटक अधिनियम की धाराएं नहीं जोड़े जाने पर एसएसपी से स्पष्टीकरण मांगा था। बाद में एफएसएल जांच में जले हुए पटाखों के अवशेष मिलने की जानकारी सामने आई और प्रकरण में विस्फोटक अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गईं।

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अब सवाल यह है कि उस घटना के बाद प्रशासन ने जो जांच कराई थी, उसकी रिपोर्ट में क्या सामने आया? शहर के पटाखा गोदामों को बाहर शिफ्ट करने के आदेश पर कितना अमल हुआ और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर क्या कार्रवाई की गई?

पेट्रोल पंप और संकरी गलियों के आसपास खतरा

वर्तमान में शहर के कुछ व्यस्त और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पटाखा दुकानों एवं गोदामों को लेकर चिंता जताई जा रही है। यदि कहीं निर्धारित सीमा से अधिक पटाखों का भंडारण हो रहा है या लाइसेंस में दर्ज स्थान से अलग स्टॉक रखा गया है, तो इसकी जांच जरूरी है।

विशेषकर पेट्रोल पंपों के आसपास पटाखों के भंडारण और संकरी गलियों में संचालित प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था का तत्काल निरीक्षण होना चाहिए। ऐसी जगहों पर आग लगने की स्थिति में दमकल वाहनों को पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है।

आदेश कागजों तक सीमित या जमीन पर भी हुई कार्रवाई?

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार किसी घटना के बाद जांच और कार्रवाई के आदेश जारी होते हैं, लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। लोगों के बीच यह व्यंग्य भी सुनने को मिलता है कि ‘कुछ नहीं होगा भैया, सब लक्ष्मी जी की माया है।’ यह टिप्पणी व्यवस्था के प्रति बढ़ते अविश्वास को दर्शाती है।

प्रशासन से नागरिकों की मांग

शहर के सभी पटाखा प्रतिष्ठानों का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए। प्रत्येक दुकान और गोदाम के लाइसेंस, भंडारण क्षमता, अग्निशमन उपकरण और सुरक्षा मानकों की जांच हो। पेट्रोल पंपों और घनी आबादी के आसपास संचालित प्रतिष्ठानों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।

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नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए और थोक पटाखा गोदामों को आबादी से दूर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए।

जनता के सीधे सवाल

  • शहर के सभी पटाखा दुकानों और गोदामों का अंतिम भौतिक सत्यापन कब हुआ?
  • क्या सभी प्रतिष्ठान स्वीकृत स्थान और निर्धारित भंडारण क्षमता के अनुसार संचालित हो रहे हैं?
  • अप्रैल में गोदामों को शहर से बाहर शिफ्ट करने के आदेश पर कितना अमल हुआ?
  • सात दिनों में मांगी गई जांच रिपोर्ट का नतीजा क्या निकला?
  • नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?

व्यापार जरूरी है, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी है। अंबिकापुर की जनता किसी दूसरे बड़े अग्निकांड का इंतजार नहीं करना चाहती। प्रशासन को आश्वासन के बजाय ठोस कार्रवाई कर यह सुनिश्चित करना होगा कि शहर के बीच बारूद का खतरा किसी निर्दोष परिवार की जिंदगी पर भारी न पड़े।

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