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सोनपुर सहकारी समिति में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: दुर्गाचरण सिंह से बोर्ड की शक्तियां वापस, श्यामलाल सिंह को मिली जिम्मेदारी,

Priyanshu Ranjan

उप आयुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं, सूरजपुर का आदेश जारी; कार्रवाई के कारणों और प्रक्रिया को लेकर उठे कई सवाल, विभाग का पक्ष आना बाकी

सूरजपुर। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित सोनपुर में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। उप आयुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं, सूरजपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार दुर्गाचरण सिंह से बोर्ड की शक्तियां वापस लेकर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर की भैयाथान शाखा के शाखा प्रबंधक श्यामलाल सिंह को समिति के बोर्ड की शक्तियों के प्रयोग के लिए अधिकृत किया गया है।

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सहकारिता विभाग किसानों, धान खरीदी, सहकारी समितियों और विभिन्न सरकारी योजनाओं के संचालन का महत्वपूर्ण विभाग माना जाता है। हालांकि समय-समय पर यह विभाग प्रशासनिक फैसलों, धान खरीदी में अनियमितताओं, बीमा भुगतान, समितियों के संचालन तथा बोर्ड की शक्तियों के उपयोग को लेकर विवादों और शिकायतों के कारण चर्चा में भी रहा है। ऐसे में सोनपुर समिति से जुड़ा यह नया आदेश भी कई सवालों को जन्म दे रहा है।

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आदेश के अनुसार यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 49(8) के तहत की गई है। कानून विभाग को विशेष परिस्थितियों में बोर्ड की शक्तियों के प्रयोग के लिए किसी अधिकारी या व्यक्ति को अधिकृत करने का अधिकार देता है, लेकिन ऐसे मामलों में कार्रवाई के कारणों और प्रक्रिया की पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है।

उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि 18 नवंबर 2024 को जारी आदेश क्रमांक 578 के माध्यम से दुर्गाचरण सिंह को आदिम जाति सेवा सहकारी समिति सोनपुर के बोर्ड की शक्तियों के प्रयोग के लिए अधिकृत किया गया था। वहीं 24 जुलाई 2026 को जारी आदेश क्रमांक 513 के तहत उनकी जगह श्यामलाल सिंह को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। ऐसे में स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठ रहा है कि यदि वर्ष 2024 में दुर्गाचरण सिंह को विभाग ने इस दायित्व के लिए योग्य माना था, तो अब उन्हें हटाने के पीछे क्या कारण रहे? क्या किसी जांच, शिकायत या विभागीय प्रक्रिया के आधार पर यह निर्णय लिया गया? क्या उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया या उनका पक्ष सुना गया? आदेश में इन पहलुओं का उल्लेख नहीं है।

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नए आदेश के बाद श्यामलाल सिंह अपनी बैंक शाखा के नियमित कार्यों के साथ-साथ समिति के बोर्ड की शक्तियों का भी प्रयोग करेंगे। इसे लेकर प्रशासनिक विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा है कि क्या एक अधिकारी पर दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपना व्यावहारिक होगा और क्या इससे दोनों संस्थाओं के कार्य प्रभावित हो सकते हैं या हितों के टकराव जैसी स्थिति उत्पन्न होने की संभावना बन सकती है।

सहकारी समिति के बोर्ड की भूमिका केवल बैठकों तक सीमित नहीं होती। बोर्ड धान खरीदी, वित्तीय निर्णय, प्रशासनिक कार्यवाही और किसानों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने का अधिकार रखता है। इसलिए बोर्ड की शक्तियां किसी अधिकारी को सौंपना केवल अतिरिक्त प्रभार नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व माना जाता है।

सूरजपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में सहकारिता विभाग पूर्व में भी धान खरीदी, बीमा भुगतान, समितियों के संचालन, प्रशासकों की नियुक्ति तथा बोर्ड की शक्तियों के उपयोग को लेकर चर्चा और विवादों में रहा है। सोनपुर समिति का यह ताजा मामला भी प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि विभाग के भीतर चल रही कथित खींचतान संबंधी चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इस समाचार में उठाए गए प्रश्न सार्वजनिक दस्तावेजों और जारी आदेश के आधार पर हैं। दुर्गाचरण सिंह, श्यामलाल सिंह, उप आयुक्त सहकारिता एवं संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा, ताकि पाठकों के सामने सभी पक्षों के साथ तथ्यात्मक, संतुलित और निष्पक्ष तस्वीर प्रस्तुत की जा सके।

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