विश्रामपुर थाना क्षेत्र के मामले में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय का बड़ा निर्णय, बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर कड़ा संदेश,
सूरजपुर। सूरजपुर जिले के विश्रामपुर थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के चर्चित मामले में फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो न्यायालय ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो न्यायालय) आनंद प्रकाश वारियाल ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कठोरतम दंड दिया जाएगा।
2025 में दर्ज हुआ था मामला
अदालत में प्रस्तुत अभिलेखों के अनुसार यह मामला मार्च-अप्रैल 2025 का है। नाबालिग पीड़िता की मां की शिकायत पर विश्रामपुर थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 70(2) तथा पॉक्सो अधिनियम, 2012 की धारा 4 एवं 6 के तहत अपराध दर्ज किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दोनों आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर विवेचना शुरू की।
वैज्ञानिक साक्ष्यों से सिद्ध हुआ अपराध
विवेचना के दौरान पुलिस ने पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया, आवश्यक वैज्ञानिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र किए, गवाहों के बयान दर्ज किए तथा समय-सीमा के भीतर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
पर्यटन स्थल से जुड़ा था मामला
घटना केनापारा फिश पॉइंट के आसपास की बताई गई, जो सूरजपुर जिले का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। इस घटना के बाद सार्वजनिक एवं पर्यटन स्थलों पर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं।
न्यायालय ने दिया महत्वपूर्ण संदेश
फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने कहा कि बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध केवल एक परिवार नहीं बल्कि पूरे समाज के खिलाफ अपराध हैं। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है। न्यायालय ने अभिभावकों से बच्चों की गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखने और किसी भी संदिग्ध घटना की तत्काल पुलिस को सूचना देने की अपील भी की।
तेज विवेचना बनी सजा की बड़ी वजह
मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई, समय पर गिरफ्तारी, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और समयबद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किए जाने से सुनवाई तेजी से पूरी हो सकी। अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी ने भी दोष सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नजीर बना फैसला
फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो न्यायालय का यह निर्णय बच्चों के खिलाफ यौन अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। यह फैसला दर्शाता है कि ऐसे मामलों में न्यायालय साक्ष्यों के आधार पर कठोरतम सजा देने से पीछे नहीं हटेगा।