छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में शामिल, मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
अंबिकापुर। मानसून की दस्तक के साथ ही छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली का खतरा भी बढ़ने लगा है। सरगुजा जिले के डुमकी गांव में हुए दर्दनाक हादसे में आम बीनने गए दो मासूम बच्चों समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक 12 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से घायल है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि ग्रामीण इलाकों में वज्रपात अब सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक बन चुका है।
जानकारी के अनुसार, डुमकी गांव में पेड़ के नीचे खड़े सागर (5), रानी (9) और रामसाय (36) पर अचानक आकाशीय बिजली गिर गई, जिससे तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं 12 वर्षीय श्रद्धा गंभीर रूप से झुलस गई, जिसका अस्पताल में उपचार जारी है।
यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब प्रदेश में मानसून की गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में गरज-चमक, तेज बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताते हुए लोगों से खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है।
पिछले वर्षों के आंकड़े बढ़ा रहे चिंता
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, 2023 में छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली से 180 लोगों की मौत हुई, जो राज्य में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली कुल मौतों का लगभग 78 प्रतिशत था। इससे पहले 2020 में 246, 2019 में 212 और 2018 में 213 लोगों की जान वज्रपात से गई थी।
देशभर के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 2024 में भारत में आकाशीय बिजली से 2,825 लोगों की मौत हुई, जिसमें मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल रहे। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती मौसमीय अस्थिरता के कारण बिजली गिरने की घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वज्रपात के दौरान सबसे अधिक खतरा खेतों, जंगलों और खुले स्थानों में काम करने वाले लोगों को होता है। पेड़ के नीचे खड़ा होना सुरक्षित नहीं बल्कि जानलेवा साबित हो सकता है।