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सूरजपुर जिले में पूरी अकीदत, अमन और भाईचारे के साथ निकला ताजिया का जुलूस,

Priyanshu Ranjan

सूरजपुर । हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों की याद में मनाया जाने वाला मोहर्रम पर्व शुक्रवार को सूरजपुर जिले में पूरी अकीदत, अमन और भाईचारे के साथ संपन्न हुआ। नगर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए, जिनका समापन कर्बला में धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक आस्था, अनुशासन और सामाजिक सौहार्द का अनूठा उदाहरण देखने को मिला।

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नगर के प्रमुख मार्गों से निकले ताजिया जुलूस-

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सूरजपुर नगर के मस्जिद पारा, महगांव, मानपुर, मिलपारा और नवापारा सहित विभिन्न मोहल्लों से पारंपरिक ताजिए निकाले गए। जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नवापारा पहुंचा, जहां निर्धारित धार्मिक कार्यक्रमों के बाद सभी ताजियों को वापस कर्बला लाया गया और पारंपरिक विधि- विधान के अनुसार ठंडा किया गया। जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने श्रद्धा और अनुशासन के साथ भाग लिया।

युवाओं ने दिखाए पारंपरिक युद्धक कौशल-

मोहर्रम जुलूस के दौरान युवाओं ने लाठी, तलवार और अन्य पारंपरिक हथियारों के साथ युद्धक कलाओं का आकर्षक प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रकार के हैरतअंगेज करतबों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में मौजूद नागरिकों ने इन प्रदर्शनों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। युवाओं ने अनुशासन और परंपरा का उत्कृष्ट परिचय देते हुए अपने कौशल का प्रदर्शन किया।

शरबत और पानी वितरण से दिया सेवा का संदेश

जुलूस मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और नागरिकों ने श्रद्धालुओं के लिए शरबत, ठंडा पानी तथा अन्य पेय पदार्थों की व्यवस्था की। भीषण गर्मी के बावजूद सेवा कार्य में जुटे स्वयंसेवकों ने मानवता और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की। राहगीरों और जुलूस में शामिल लोगों ने इस सेवा भावना की सराहना की।

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प्रशासन रहा पूरी तरह सतर्क

मोहर्रम पर्व को लेकर जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था, जबकि जुलूस के पूरे मार्ग पर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी करते रहे। प्रशासन की सतर्कता और नागरिकों के सहयोग से पूरा आयोजन शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

नौ दिनों तक गूंजता रहा इमाम हुसैन का जिक्र

मोहर्रम के अवसर पर जिले की विभिन्न मस्जिदों और इमामबाड़ों में लगातार नौ दिनों तक मजलिसों का आयोजन किया गया। उलेमा-ए-किराम ने अपने संबोधन में हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की कुर्बानी, इंसाफ, सत्य, मानवता और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष के संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला। अकीदतमंदों ने बड़ी संख्या में शिरकत कर इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

त्याग और भाईचारे का संदेश…

मोहर्रम का पर्व एक बार फिर यह संदेश देकर संपन्न हुआ कि सत्य, न्याय, त्याग और मानवता की रक्षा के लिए दिया गया बलिदान सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा, धार्मिक आस्था, सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे के वातावरण में संपन्न हुए इस आयोजन ने जिले में एकता और सौहार्द की मजबूत मिसाल प्रस्तुत की।

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