अंबिकापुर । ऊर्जा संकट, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर डॉ. योगेंद्र सिंह गहरवार द्वारा लिखे गए विचार इन दिनों चर्चा में हैं। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सुजान बिंद की साइकिल यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी पहल को व्यक्ति विशेष की राजनीतिक पहचान से नहीं, बल्कि उसके समाज और राष्ट्रहित से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
डॉ. गहरवार ने लिखा कि सुजान बिंद ‘मोदी भक्त’ नहीं बल्कि ‘राष्ट्र भक्त’ हैं और उनकी सोच समाजहित से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि असली प्रश्न यह नहीं होना चाहिए कि कौन क्या कह रहा है या कब कह रहा है, बल्कि यह होना चाहिए कि उस विचार से देश, समाज और आने वाली पीढि़यों का भला होगा या नहीं।
‘अच्छे विचारों को स्वीकार करना ही परिपक्व समाज की पहचान :
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की पहल से ऊर्जा बचत, पर्यावरण संरक्षण, बेहतर स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है, तो उसे केवल वैचारिक मतभेद के कारण खारिज नहीं किया जाना चाहिए। डॉ. गहरवार के अनुसार राष्ट्र निर्माण व्यक्तियों के अहंकार से नहीं बल्कि अच्छे विचारों को स्वीकार करने की सामूहिक क्षमता से होता है।
होर्मुज संकट के बीच ऊर्जा बचत पर जोर :
उन्होंने वैश्विक ऊर्जा संकट और होर्मुज खाड़ी जैसी परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अभी भी पेट्रोलियम उत्पादों के लिए बड़े स्तर पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में केवल लोगों से पेट्रोल- डीजल कम उपयोग करने की अपील पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि ऐसी शहरी संरचना विकसित करनी होगी जिससे लोग स्वाभाविक रूप से साइकिल और पैदल चलने को अपनाएं।
अंबिकापुर में डेडिकेटेड साइकिल कॉरिडोर की मांग :
डॉ. गहरवार ने अंबिकापुर शहर में डेडिकेटेड साइकिल कॉरिडोर विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि एग्रीकल्चर कॉलेज से महामाया मंदिर तक तथा उत्तर-दक्षिण बिलासपुर चौक से प्रतापपुर तक सुरक्षित साइकिल ट्रैक बनाए जाने चाहिए। इसके अलावा बनारस चौक से गांधीनगर और रिंग रोड तक वॉकिंग एवं साइकिलिंग ट्रैक विकसित करने की भी आवश्यकता बताई गई।
सिर्फ फ्लाईओवर नहीं, सुरक्षित पैदल और साइकिल संस्कृति भी विकास
उन्होंने कहा कि किसी शहर का विकास केवल चौड़ी सड़कें और फ्लाईओवर बनने से नहीं मापा जाना चाहिए। वास्तविक विकास तब माना जाएगा जब नागरिक बिना भय के पैदल चल सकें और सुरक्षित रूप से साइकिल चला सकें। उनके अनुसार ऐसी व्यवस्था बनने से लोग छोटी दूरियों के लिए मोटर वाहनों पर निर्भरता कम करेंगे, जिससे ईंधन की बचत होगी और पर्यावरण भी बेहतर होगा।
स्वास्थ्य लाभ भी होंगे।
डॉ. गहरवार ने कहा कि साइकिल और वॉकिंग संस्कृति बढ़ने से मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज जो कदम ऊर्जा संकट के कारण जरूरी लग रहे हैं, वही भविष्य में स्वस्थ और आत्मनिर्भर भारत की पहचान बन सकते हैं।