अंबिकापुर । छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में अंतर्राज्यीय लकड़ी तस्करों ने आतंक का पर्याय रच दिया है। सीतापुर क्षेत्र के गांवों में अब कानून का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश से आए तस्करों और उनके स्थानीय गुर्गों का खौफ बोल रहा है। ये तस्कर न केवल सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों की निजी भूमि पर लगे दशकों पुराने पेड़ों को भी डंके की चोट पर काट रहे हैं।
आलम यह है कि जो ग्रामीण अपनी संपत्ति बचाने की कोशिश करता है, उसे जान से मारने की धमकी दी जाती है या सरेआम मारपीट कर उसका मनोबल तोड़ दिया जाता है। प्रशासन की सुस्ती ने इन अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि अब उन्हें न तो पुलिस का डर है और न ही कानून का। भोले-भाले ग्रामीणों के लिए उनकी जमीन ही अब असुरक्षित हो गई है, क्योंकि तस्करों का नेटवर्क गांव-गांव में सक्रिय है जो पहले पेड़ों को औने-पौने दामों में खरीदने का झांसा देते हैं और इनकार करने पर गुंडागर्दी पर उतर आते हैं।