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प्रदेश सरकार की भूमि डायवर्सन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आनलाइन करने का निर्णय अब भी जमीन पर लागू नहीं,

Priyanshu Ranjan

सूरजपुर । प्रदेश सरकार द्वारा भूमि डायवर्शन (भूमि उपयोग परिवर्तन) प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से इसे ऑनलाइन करने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश भी जारी किए थे। बावजूद इसके, प्रदेश के अधिकांश जिलों में यह व्यवस्था अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है, जिससे शासन की मंशा और जमीनी क्रियान्वयन के बीच अंतर साफ नजर आ रहा है।

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बता दे कि फरवरी 2026 में जारी आदेश (RULE-5/87/2025-REVENUE) के अनुसार भूमि डायवर्शन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जानी है। इस व्यवस्था के तहत नागरिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। प्रीमियम और भू-राजस्व की गणना ऑनलाइन की जानी है। भुगतान डिजिटल माध्यम से होना है और पावती भी ऑनलाइन जनरेट की जानी है। साथ ही पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रिकॉर्ड आधारित बनाकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने का उद्देश्य रखा गया है।

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हालांकि जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत है। सूरजपुर सहित संभाग के कई जिलों में अब भी पारंपरिक ऑफलाइन प्रक्रिया ही चल रही है। आवेदकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और फाइलों के निपटारे में अनावश्यक देरी हो रही है, इससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है बल्कि अतिरिक्त खर्च का बोझ भी आम नागरिकों पर पड़ रहा है।

इस व्यवस्था के लागू न होने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। प्रमुख रूप से तकनीकी संसाधनों की कमी एक बड़ी समस्या है। कई तहसील और राजस्व कार्यालयों में पर्याप्त कंप्यूटर और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा कर्मचारियों को ऑनलाइन प्रणाली के संचालन के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है, जिससे वे नई व्यवस्था को अपनाने में असहज महसूस कर रहे हैं। वहीं कुछ स्थानों पर प्रशासनिक उदासीनता भी देखने को मिल रही है, जिससे योजना का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है।

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शासन के नियमों में पूरी प्रक्रिया स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है, जिसमें आवेदन से लेकर भू-अभिलेख संशोधन तक सभी कार्य ऑनलाइन करने का प्रावधान है। इसके बावजूद, इन नियमों का पालन धरातल पर नहीं हो रहा है, जो व्यवस्था की कमजोर निगरानी को दर्शाता है।

यदि शीघ्र ही आवश्यक तकनीकी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए, कर्मचारियों को प्रशिक्षित नहीं किया गया और अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो यह योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएगी। फिलहाल स्थिति यह है कि सरकार की मंशा सरलीकरण की है, लेकिन आम जनता को अभी भी जटिल और धीमी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।

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