भरत शर्मा की रिपोर्ट
रतलाम/ जिले के नामली नगर में झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है, जिससे आमजन की जिंदगी गंभीर खतरे में पड़ गई है। शासन द्वारा चिकित्सा सेवाओं के लिए स्पष्ट मापदंड निर्धारित किए गए हैं, जिनमें डिग्री, पंजीयन और आवश्यक सुविधाएं अनिवार्य हैं, लेकिन नामली में इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
नगद नारायण की ताकत के सहारे कई लोग बड़े-बड़े क्लिनिक और दवाखाने संचालित कर रहे हैं, जहां बिना किसी वैध योग्यता के इलाज किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ये झोलाछाप डॉक्टर खुद को “भगवान” से कम नहीं मानते और मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमानी फीस वसूलते हैं। हालत यह है कि छोटी-सी बीमारी में भी भारी दवाइयां और गलत इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं, जिससे मरीजों की जान तक जा सकती है। कई बार गंभीर स्थिति बनने पर मरीजों को बड़े शहरों में रेफर कर दिया जाता है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार विभाग इन अवैध क्लिनिकों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? क्या केवल कागजी खानापूर्ति से ही स्वास्थ्य व्यवस्था चलेगी? बंद कमरों में चल रही सांठगांठ के चलते इन झोलाछापों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा, जिससे उनका हौसला लगातार बढ़ता जा रहा है। अब जरूरत है सख्त और पारदर्शी कार्रवाई की, ताकि नामली के नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल अभियान चलाकर ऐसे फर्जी डॉक्टरों पर लगाम लगाए, वरना यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है
