सूरजपुर। जिले की एसईसीएल की केतकी, गायत्री एवं रेहर (रहे) खदानों में रोजगार प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशिक्षित मजदूरों को काम से वंचित कर बाहरी लोगों को अवैध लेन-देन के आधार पर रोजगार देने का आरोप लगाया है।
इस संबंध में प्रभावित पंचायतों जोबगा, केतका, लाछा, पोडी, मानी एवं गेतरा के ग्रामीणों ने शिवानी जायसवाल, अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) सूरजपुर को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि एसईसीएल द्वारा ठेकेदारों के माध्यम से लगभग 50 दिनों की बीटीसी ट्रेनिंग कराई जाती है, लेकिन प्रशिक्षण के नाम पर प्रति मजदूर 10 से 15 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। इसके बावजूद प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके स्थानीय मजदूरों को रोजगार नहीं दिया जा रहा।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खदानों में बाहरी व्यक्तियों से 70 से 80 हजार रुपये तक लेकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है, जो शासन के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि औद्योगिक और खनन परियोजनाओं में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि खदानों में कोयला उत्खनन का कार्य एसएमएस एवं गैनवेल कंपनी को मिला हुआ है। इन कंपनियों के लिए लेबर सप्लाई से जुड़े कुछ व्यक्तियों पर स्थानीय प्रशिक्षित मजदूरों की अनदेखी करने और नियमों को दरकिनार करने के आरोप लगाए गए हैं।
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी असर
ग्रामीणों ने रोजगार के साथ-साथ खदान क्षेत्र से जुड़ी पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की ओर भी प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया। उनका कहना है कि खदानों में पानी के छिड़काव के कारण अत्यधिक कीचड़ बन रहा है, जो ट्रक-ट्रालों के टायरों के साथ सड़कों पर फैल जाता है। इससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और स्कूलों सहित आसपास के घरों में कोयले की धूल जमा हो रही है।
इस स्थिति के कारण बच्चों, बुजुर्गों और आम ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। धूल और गंदगी से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
1. पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच
2. दोषी ठेकेदारों और संबंधित व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई
3. प्रशिक्षित स्थानीय मजदूरों को तत्काल रोजगार
4. प्रदूषण नियंत्रण एवं क्षतिग्रस्त सड़कों का स्थायी समाधान
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।

