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रेलवे की काना फुसी ; विजिलेंस से आए भैया ‘ आशिक आवारा’ जी की सेवा करने वाले को आराम,बाकी की नींद हराम।

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जिला ब्यूरो की रिपोर्ट

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रतलाम/विगत दिनों आपने पढ़ा होगा कि किस तरह से विजिलेंस से आए भैया आशिक आवारा और टिंगू जी की जोड़ी ने धमाल मचा रखी है यह दोनों ही जोड़ी कुछ दिनों से गायब हो गई थी पारिवारिक कारणों के चलते तो काले कोटवालों ने भी इनको वापस न आने के लिए खूब अगरबत्ती लगाई, लेकिन वह अगरबत्ती थोड़े दिन ही चल सकी और आखिरकार थोड़े दिन पहले तो आशिक आवारा जी पधार गए और आते ही परेशान करने में काम पर लग गए ,पहले संदेश यही दिया कि फलाने काले कोट वाले की गाड़ी क्यों बदली कैसे बदली किस नियम से बदली और उसके बाद सुबह होते-होते चालू हो गए पूरे रतलाम डिवीजन में हल्ला मचाने में अब उनका आतंक खत्म ही नहीं हुआ था कि रतलाम मुख्यालय वाले काले कोटवालों को कहां आराम मिलना था और टिंगू जी ने ज्वाइन कर लिया अब पहले की खबरें तो टिंगू जी को भी लग गई थी और पढ़ भी ली थी किस तरह से उनका और उनके आका ‘आशिक आवारा ‘ जी का चरित्र चित्रण हो रहा है लेकिन टिंगू जी यह भूल गए कि उनके पुराने कर्म भी ऐसे ही है जिस कुर्सी पर वह बैठे हैं इससे पहले जो लोग बैठे थे उनको भी किस तरह से टिंगू जी ने परेशान थे यह शायद उन्हें याद नहीं क्योंकि टिंगू जी की याददाश्त इन चीजों में थोड़ी कमजोर है हालांकि अब टिंगू जी फिलहाल वापस आ गए हैं।

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अब बात करते हैं विजलेंस वाले भैया ‘आशिक आवारा ‘ जी की सेवा की तो कुछ महीनों पहले इन्होंने महू के पास एक अत्यंत गोपनीय पार्टी किसी के एक के पर्सनल फार्म हाउस पर पूल पार्टी के रूप में की ,सूत्र बताते है की महू में कार्यरत काले कोट वालों का पूरा स्टाफ सेवा चाकरी में लगा रहा उस पार्टी में ‘ आशिक आवारा’ जी के लिए महंगी शराब और कई तरह के मांसाहारी पकवान बनाए गए और एक काले कोट वाले ‘ बल वाले राम ‘ने आशिक आवारा जी के विजिलेंस में रहते एक एहसान के बदले में ‘ आशिक आवारा’ जी की मर्जी अनुसार पार्टी आयोजित की यह पार्टी तकरीबन डेढ़ लाख रुपए के खर्चे वाली थी अब इतनी महंगी पार्टी तो इस विभाग के प्रमुख या प्रमुख से छोटे और सबसे छोटे अधिकारी को भी नहीं मिली होगी ,और दे वे भी क्यों उनकी चल कहां रही है सब तो दिमाग विजिलेंस से आए भैया ‘आशिक आवारा’ में ही है ना

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हालांकि इस पार्टी से विजिलेंस से आए भैया’ आशिक आवारा ‘ जी खुश हो गए और बल के राम ने भी पुराना एहसान चुका दिया।

सूत्र बताते हैं कि आशिक आवारा जी पहले जिस विभाग में थे उस विभाग के लोग भी अब इनकी नहीं सुनते हैं क्योंकि वहां पर भी इनके व्यवहार से सब परेशान थे, पर महोदय अपना आभामंडल बनाने के लिए काले कोट वालों को बताते हैं उनकी बहुत चलती हो और आज भी वह काम करने में सक्षम है जबकि हकीकत यह है कि पुराने विभाग के लोग ‘ आशिक आवारा’ जी के व्यवहार से अच्छे खासे परेशान थे।आशिक आवारा जी के लिए मालवा कि यह कहावत ठीक बैठती है

घर के चिरागों ने घर में आग लगा दी

बस अब विभाग के प्रमुखों को समझना होगा कि ऐसे लोगों को ऐसे कार्य से दूर रखना चाहिए ताकि विभाग की बदनामी ना हो।

अभी हुए प्रिडिकल ट्रांसफर में भी खुलकर हुआ भाई भतीजा वाद ओर मनमानी ।

कुछ दिनों पहले एक पैरोडीकल ट्रांसफर की सूची आई जिसमें की कुल मिलाकर 8 नाम थे और 2 को फायदा पहुंचाने की दृष्टि से यह स्थानांतरण हुए इसमें एक राम के रतन को सीधा-सीधाu फायदा पहुंचाने के चक्कर में दि – नेस के आर को जबरन प्रशासन के पैसे का दुरुपयोग कर प्रशासनिक हित में रतलाम पहुंचा दिया और एक को महू से विजिलेंस से आए ‘ आशिक आवारा ‘ की बात ना मानने पर प्रशासनिक हित में लाया गया जहां एक तरफ देश की सरकार भ्रष्टाचार को खत्म कर रही है वहीं रतलाम मुख्यालय पर यह खेल खुलेआम चल रहा है। और इस तरफ प्रशासन को ध्यान देना चाहिए नहीं तो यह छोटा घाव बड़े जख्म के रूप में सामने आएगा।

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आगे के अंक में आपको बताएंगे किस तरह से टिंकू जी के साथ लंबू जी भी अपने आप को कम नहीं समझ रहे। और आखिर इस विभाग में कौन कंबल ओढ़ कर घी पी रहा है

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