नामली से जिला ब्यूरो की रिपोर्ट
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नामली।ग्रामीण क्षेत्रों में तहसील कार्यालय आम जनता और किसानों के लिए न्याय का प्रमुख केंद्र माना जाता है। जमीन-जायदाद से जुड़े विवाद, नामांतरण, सीमांकन, फसल क्षति, शासकीय योजनाओं से जुड़े दस्तावेज जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्यों के लिए लोग तहसीलदार के पास पहुंचते हैं। तहसीलदार को प्रशासनिक व्यवस्था में एक ऐसे जिम्मेदार अधिकारी के रूप में देखा जाता है जो गरीब और सामान्य नागरिकों की समस्याओं का समाधान कर सके।
लेकिन जब यही जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी आम जनता से दूरी बना ले, तो लोगों की उम्मीदें निराशा में बदलने लगती हैं।
ऐसा ही मामला इन दिनों नामली तहसील कार्यालय को लेकर चर्चा में है। बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष यहां पदस्थ हुए तहसीलदार संदीप इनवे को लेकर क्षेत्र में लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। तहसील कार्यालय में रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन कई बार उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यालय के बाहर अक्सर लंबी कतारें लगी रहती हैं,लेकिन साहब से मिल पाना आसान नहीं होता। कई बार लोग घंटों इंतजार करने के बाद भी बिना समाधान के वापस लौट जाते हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह बताई जा रही है कि जब लोग अपनी समस्या बताने के लिए तहसीलदार को फोन करने की कोशिश करते हैं, तो उनका मोबाइल फोन या तो बंद रहता है या फिर कई लोगों के नंबर ब्लैकलिस्ट में डाल दिए जाने की शिकायत सामने आती है।
ग्रामीणों का कहना है कि तहसील कार्यालय में जमीन से जुड़े मामलों की भरमार रहती है नामांतरण, सीमांकन, खसरा-नक्शा, फसल नुकसान और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए किसान बार-बार चक्कर लगाने को मजबूर हो रहे हैं। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि तहसीलदार के अधीन कार्यरत कुछ पटवारियों के खिलाफ भी शिकायतें मिलती रहती हैं, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती।
जनता का कहना है कि तहसील प्रशासन से उन्हें न्याय और पारदर्शिता की उम्मीद रहती है। तहसीलदार को ग्रामीणों के लिए “भगवान समान” अधिकारी माना जाता है, क्योंकि उनकी एक सुनवाई से कई परिवारों की समस्याओं का समाधान हो सकता है। ऐसे में यदि अधिकारी जनता से संवाद ही बंद कर दें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नामली तहसील में प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने के लिए उचित कदम उठाए जाएं, ताकि आम नागरिक और किसानों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भटकना न पड़े और शासन-प्रशासन पर जनता का विश्वास बना रहे।



