किसानों से समय पर पंजीयन कराने और निर्धारित तिथियों में फसल बेचने की अपील
अम्बिकापुर 14 अक्टूबर 2026/
उपसंचालक कृषि ने बताया कि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत जिले में अधिसूचित दलहनी एवं तिलहनी फसलों के उपार्जन की अवधियां और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित कर दिए गए हैं। शासन द्वारा जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार खरीफ एवं रबी सीजन की विभिन्न फसलों की सरकारी खरीदी निर्धारित समयावधि में की जाएगी।
फसलवार उपार्जन अवधि और समर्थन मूल्य-
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अरहर (तुअर) की खरीदी 15 फरवरी 2027 से 15 मई 2027 तक की जाएगी। इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,450 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
वहीं, मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन का उपार्जन 1 दिसंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक किया जाएगा। इन फसलों का समर्थन मूल्य क्रमशः मूंग के लिए 8,780 रुपये, उड़द के लिए 8,200 रुपये, मूंगफली के लिए 7,517 रुपये और सोयाबीन के लिए 5,708 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।
चना एवं मसूर की खरीदी 1 मार्च 2027 से 30 मई 2027 तक होगी। चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,875 रुपये तथा मसूर का 7,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
इसी तरह सरसों का उपार्जन 15 फरवरी 2027 से 15 मई 2027 तक किया जाएगा। सरसों के लिए समर्थन मूल्य 6,200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
जिले में सात उपार्जन केंद्र अधिसूचित-
जिले में उपार्जन के लिए दरिमा, कुन्नी, चांदो (लखनपुर), उदयपुर, ससौली, राजापुर और कमलेश्वरपुर केंद्र अधिसूचित किए गए हैं। किसान निर्धारित अवधि के दौरान इन केंद्रों के माध्यम से अपनी अधिसूचित फसलों का विक्रय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कर सकेंगे।
एकीकृत किसान पोर्टल पर होगा पंजीयन-
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों का पंजीयन एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी की सहायता से अथवा संबंधित सेवा सहकारी समिति में आवश्यक दस्तावेज जमा कर पंजीयन करा सकते हैं।
पंजीयन के लिए ऋण पुस्तिका, बी-1, पी-2, आधार कार्ड और बैंक पासबुक की छायाप्रति आवेदन पत्र के साथ संबंधित सेवा सहकारी समिति में जमा करनी होगी। इसके साथ एग्रीस्टैक पंजीयन कराना भी अनिवार्य बताया गया है।
समय पर पंजीयन कराने की अपील-
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी फसलों की उपार्जन अवधि का ध्यान रखते हुए समय पर पंजीयन कराएं और निर्धारित तिथियों में संबंधित उपार्जन केंद्रों पर अपनी उपज लेकर पहुंचें, ताकि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके।