सूरजपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा शैक्षणिक सत्र 2027-28 की हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी बोर्ड परीक्षाओं के लिए जारी नए निर्देशों को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध जताया है। संघ ने विद्यार्थियों की सुविधा, सुरक्षा और समान अवसरों का हवाला देते हुए परीक्षा केंद्रों की पूर्व व्यवस्था को यथावत रखने तथा नए निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है।
संघ का कहना है कि परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में किए जा रहे बदलावों का सबसे अधिक असर ग्रामीण, दूरस्थ और आदिवासी अंचलों के विद्यार्थियों पर पड़ सकता है। यदि विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए पहले की तुलना में अधिक दूरी तय करनी पड़ी, तो उन्हें आवागमन की परेशानी के साथ अतिरिक्त आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।
दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों की बढ़ सकती है परेशानी
छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में कई गांव ऐसे हैं, जहां नियमित सार्वजनिक परिवहन की सुविधा सीमित है। ऐसी परिस्थितियों में परीक्षा केंद्र दूर होने पर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के सामने समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
संघ ने विशेष रूप से गरीब, ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के विद्यार्थियों की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। संगठन का मानना है कि अतिरिक्त यात्रा खर्च और परिवहन की अनुपलब्धता के कारण कई परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। जिन विद्यार्थियों के पास निजी वाहन या वैकल्पिक परिवहन की सुविधा नहीं है, उनके लिए यह स्थिति और कठिन हो सकती है।
सुबह 9:15 बजे परीक्षा, समय पर पहुंचना बड़ी चुनौती
संघ ने बताया कि बोर्ड परीक्षाएं सुबह 9:15 बजे से शुरू होती हैं। ऐसे में दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्र तक समय पर पहुंचने के लिए सुबह जल्दी घर से निकलना पड़ सकता है। ग्रामीण इलाकों में परिवहन की अनिश्चितता को देखते हुए विद्यार्थियों के परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में देरी की आशंका भी बनी रह सकती है।
परीक्षा केंद्रों की दूरी बढ़ने से छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। संघ का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था बनाते समय केवल प्रशासनिक सुविधा ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की भौगोलिक परिस्थितियों, आवागमन के साधनों और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
छात्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग
छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए। बोर्ड परीक्षाएं विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ी होती हैं, इसलिए परीक्षा केंद्रों का निर्धारण इस तरह किया जाना चाहिए कि किसी भी विद्यार्थी को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
संघ के मुताबिक, परीक्षा केंद्रों की दूरी बढ़ने से विद्यार्थियों की उपस्थिति, तैयारी और परीक्षा के दौरान उनके प्रदर्शन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे में किसी भी नए बदलाव को लागू करने से पहले उसके संभावित प्रभावों का आकलन करना जरूरी है।
जिलाध्यक्ष सचिन त्रिपाठी ने उठाए सवाल
संघ के सूरजपुर जिलाध्यक्ष सचिन त्रिपाठी ने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों पर अमल करने से पहले शिक्षक संगठनों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों, परिवहन सुविधाओं और विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही परीक्षा केंद्र निर्धारित किए जाने चाहिए।
उन्होंने राज्य शासन और छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से मांग की कि छात्रहित को ध्यान में रखते हुए नए निर्देशों पर पुनर्विचार किया जाए और परीक्षा केंद्रों की पूर्व व्यवस्था को यथावत रखा जाए।
त्रिपाठी ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा, सुविधा और समान अवसर सुनिश्चित करना शिक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। परीक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान रूप से परीक्षा देने का अवसर मिल सके।
मांग नहीं मानी गई तो लोकतांत्रिक तरीके से उठाएंगे आवाज
छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों के हितों को प्रभावित करने वाले निर्णय पर सकारात्मक पहल नहीं होने की स्थिति में संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेगा। संघ ने कहा कि विद्यार्थियों की सुविधा और उनके भविष्य की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर प्रयास करेगा।
फिलहाल संघ ने राज्य शासन और माध्यमिक शिक्षा मंडल से नए निर्देशों पर पुनर्विचार कर विद्यार्थियों के हित में निर्णय लेने की अपील की है। अब इस मांग पर संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया और आगे होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।