प्रधान पाठक गौतम शर्मा की पहल पर समाजसेवी और साहू बोरवेल संचालक मुकेश साहू ने बढ़ाया सहयोग का हाथ
सूरजपुर। जब शिक्षक विद्यालय को समुदाय से जोड़ने की पहल करता है और समाज उस पहल में सहभागी बनता है, तो शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की राह तैयार होती है। सूरजपुर के शासकीय प्राथमिक शाला चट्टीडांड़ में ‘मेरा स्कूल-मेरी जिम्मेदारी’ के तहत ऐसी ही सामाजिक सहभागिता देखने को मिली।
विद्यालय के प्रधान पाठक गौतम शर्मा द्वारा स्कूल को समाज से जोड़ने और बच्चों की आवश्यकताओं को जनसहयोग से पूरा करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी पहल के तहत सूरजपुर के समाजसेवी एवं साहू बोरवेल के संचालक मुकेश साहू ने विद्यालय में अध्ययनरत सभी बच्चों के लिए स्कूल बैग उपलब्ध कराए और उनका वितरण किया।
बच्चों के चेहरों पर दिखी खुशी
स्कूल बैग मिलने पर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। बच्चों के लिए यह बैग केवल शैक्षणिक सामग्री नहीं, बल्कि समाज की ओर से मिले स्नेह, सहयोग और प्रोत्साहन का संदेश भी रहा।
प्रधान पाठक गौतम शर्मा ने विद्यालय की आवश्यकताओं और बच्चों की जरूरतों को समाज के सामने रखते हुए ‘मेरा स्कूल-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उनका उद्देश्य विद्यालय को केवल शिक्षक और शिक्षा विभाग तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय समुदाय को भी विद्यालय के विकास और बच्चों के भविष्य से जोड़ना है।
समाज की भागीदारी से मजबूत हो सकता है सरकारी स्कूल
मुकेश साहू की इस पहल को इसी सामाजिक सहभागिता की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। चट्टीडांड़ विद्यालय में सामने आई यह पहल बताती है कि सरकारी स्कूलों के विकास में स्थानीय समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
स्थानीय नागरिक, समाजसेवी, व्यवसायी और सामाजिक संगठन अपने आसपास के विद्यालयों से जुड़कर बच्चों की जरूरतों में सहयोग करें, तो विद्यालय और समाज के बीच संबंध और मजबूत हो सकते हैं।
‘मेरा स्कूल-मेरी जिम्मेदारी’ को व्यवहार में उतारने की पहल
प्रधान पाठक गौतम शर्मा का कहना है कि विद्यालय केवल शिक्षकों का कार्यस्थल नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के बच्चों के भविष्य निर्माण का केंद्र है। इसलिए विद्यालय के विकास में समाज की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है।
उनका प्रयास है कि बच्चों की जरूरतों को समझते हुए समाज के सहयोग से विद्यालय में सकारात्मक और प्रेरक वातावरण तैयार किया जाए। चट्टीडांड़ विद्यालय में स्कूल बैग वितरण की यह पहल इसी सोच को आगे बढ़ाती है कि ‘मेरा स्कूल-मेरी जिम्मेदारी’ केवल एक वाक्य न रहकर व्यवहार में भी दिखाई दे।
जब समाज अपने आसपास के सरकारी विद्यालय को अपना विद्यालय मानकर बच्चों के लिए आगे आता है, तो सहयोग की छोटी-सी पहल भी बच्चों के मन में बड़ा विश्वास पैदा करती है।