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अंबिकापुर से बड़े रूट पर चलने वाली यात्री बसों में बिना किसी दस्तावेज के बड़ी संख्या में भेजे जा रहे पार्सलों पर कोई कार्यवाही नहीं होने से लोगों में चर्चा का बाजार गर्म,,,

Priyanshu Ranjan

अंबिकापुर ।रायपुर, बिलासपुर, बनारस, रांची और झारखंड रूट पर चलने वाली निजी बसों में कथित अवैध लगेज ढुलाई और बिना दस्तावेज सामान परिवहन के आरोपों पर अब तक कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आने से मामला और गर्मा गया है।

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यात्रियों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों के बीच अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर लगातार शिकायतों और खुली चर्चाओं के बावजूद परिवहन विभाग, जीएसटी विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई क्यों दिखाई नहीं दे रही। क्षेत्र में चर्चा है कि कुछ निजी बसों में यात्री परिवहन से ज्यादा प्राथमिकता पार्सल और व्यावसायिक सामान ढुलाई को दी जा रही है।

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आरोप है कि सीटों के नीचे, गैलरी, डिक्की और कई बार बस की छत तक सामान भर दिया जाता है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों प्रभावित हो रही हैं।

कार्रवाई नहीं होने से बढ़े सवाल…

मामला सामने आने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि संबंधित विभाग बस स्टैंडों और प्रमुख रूटों पर संयुक्त जांच अभियान चलाएंगे। लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी न तो बड़े स्तर की चेकिंग दिखाई दी और न ही किसी बस ऑपरेटर के खिलाफ सार्वजनिक कार्रवाई की जानकारी सामने आई। इसी को लेकर अब बाजार और परिवहन क्षेत्र में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस पूरे नेटवर्क पर किसी प्रकार का संरक्षण प्राप्त है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे वाहन चालकों और सामान्य परिवहनकर्ताओं पर तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े बस नेटवर्क के मामलों में विभागीय सख्ती नजर नहीं आती।

यात्रियों की सुरक्षा पर भी खतरा…

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यात्रियों का आरोप है कि कई बसों में इतनी अधिक मात्रा में पार्सल भर दिए जाते हैं कि बैठने और सामान रखने तक में परेशानी होती है। कुछ यात्रियों ने बताया कि लंबी दूरी के सफर में गैलरी तक सामान से भरी रहती है, जिससे दुर्घटना या आपात स्थिति में बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यात्री बसों में अनियंत्रित लगेज लोडिंग सुरक्षा मानकों के खिलाफ है और इससे हादसों का खतरा बढ़ सकता है।

रात में सक्रिय होता है पार्सल नेटवर्क

स्थानीय सूत्रों के अनुसार रात के समय कई बस एजेंटों और ऑपरेटरों के माध्यम से बड़े पैमाने पर पार्सल बुकिंग की जाती है। बताया जा रहा है कि इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े, कॉस्मेटिक सामग्री, दवाइयां, किराना और अन्य व्यावसायिक सामग्री नियमित रूप से बसों के जरिए रायपुर, बिलासपुर, रांची, बनारस और झारखंड के विभिन्न जिलों तक भेजी जा रही है। लेकिन अधिकांश मामलों में सामान के साथ उचित जीएसटी बिल, ई-वे बिल या परिवहन दस्तावेज नहीं होने की चर्चा है।
लोगों का कहना है कि यदि दस्तावेजों की गंभीरता से जांच की जाए तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।

झारखंड रूट पर बढ़ी गतिविधियों की चर्चा…

स्थानीय व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि झारखंड की ओर जाने वाली बसों में हाल के महीनों में पार्सल गतिविधियां और बढ़ी हैं। आरोप है कि कई बसों में यात्रियों से ज्यादा प्राथमिकता लगेज बुकिंग को दी जा रही है। कुछ लोगों का कहना है कि रात के समय संदिग्ध पैकेट भी बिना जांच के लोड किए जाते हैं, जिससे अवैध वस्तुओं की ढुलाई की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

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टैक्स चोरी का बड़ा नेटवर्क?

व्यापारिक वर्ग के बीच यह चर्चा भी तेज है कि यदि बिना ई-वे बिल और जीएसटी दस्तावेजों के नियमित रूप से व्यावसायिक सामान की ढुलाई हो रही है, तो इससे शासन को बड़े पैमाने पर राजस्व हानि हो सकती है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि व्यावसायिक माल परिवहन के लिए निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है। यदि माल का स्रोत, बिलिंग और टैक्स रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं हो तो मामला गंभीर माना जा सकता है।

यात्री बस या चलता-फिरता पार्सल गोदाम?

शहर में अब यह सवाल चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर यात्री बसों का उपयोग परिवहन सेवा के लिए हो रहा है या फिर उन्हें ‘चलता-फिरता पार्सल गोदाम’ बना दिया गया है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस नेटवर्क पर सख्ती नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यात्री सुरक्षा, टैक्स व्यवस्था और कानून व्यवस्था तीनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि संबंधित विभाग कब जागेंगे और क्या वास्तव में इस कथित अवैध लगेज नेटवर्क पर कोई बड़ी कार्रवाई होगी या मामला केवल चर्चाओं तक सीमित रह जाएगा।

विभागीय संयुक्त जांच की मांग तेज…

स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और यात्रियों ने अब संयुक्त जांच अभियान की मांग तेज कर दी है। लोगों का कहना है किः

– प्रमुख बस स्टैंडों पर नियमित जांच हो।
– बसों में लोड पार्सलों के दस्तावेज जांचे जाएं।
– जीएसटी ई-वे बिल और टैक्स रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाए।
– बिना दस्तावेज माल ढुलाई पर सख्त कार्रवाई हो।
– यात्रियों की सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
– झारखंड और अन्य राज्यों में जाने वाली बसों की विशेष निगरानी हो।

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