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बिजली की आंख मिचौली से हफ्तों से कराह रहा है सरगुजा संभाग का हाई प्रोफाइल शहर अंबिकापुर, अधिकारियों की सुस्ती से जनता में आक्रोश,

Priyanshu Ranjan

अंबिकापुर । छत्तीसगढ़ के हाई- प्रोफाइल सरगुजा संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर में इन दिनों विकास की नहीं, बल्कि अघोषित बिजली कटौती और विभागीय निकम्मेपन की बत्ती जल रही है। भीषण गर्मी के इस दौर में पूरा शहर पिछले दो हफ्तों से बिजली विभाग की ‘आंख-मिचौली’ से कराह रहा है, लेकिन हुक्मरानों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
सबसे शर्मनाक और हैरान करने वाली बात यह है कि यह ऊर्जा विभाग किसी अदने मंत्री के पास नहीं, बल्कि खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की जेब में है।

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अब त्रस्त जनता सीधे मुख्यमंत्री से सवाल पूछ रही है कि जब सूबे के मुखिया का अपना ही विभाग इस कदर वेंटिलेटर पर है, तो बाकी विभागों और पूरे प्रदेश के राम भरोसे चलने का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
21 मई 2026 की रात को भी पूरा अम्बिकापुर उमस और अंधेरे के नरक में डूबा हुआ है, जो यह साबित करने के लिए काफी है कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत में कितना बड़ा फासला है।

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नागरिक कई बार बिजली दफ्तरों के चक्कर काटकर अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं, लेकिन अधिकारियों की बेशर्मी का आलम यह है कि वे जनता की तकलीफों पर हंस रहे हैं। जब छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख और रसूखदार शहर का यह हाल है, तो दूर-दराज के गांवों और कस्बों की सुध कौन लेगा? विभागीय अधिकारी न तो कटौती का कारण बताते हैं और न ही कोई आधिकारिक जानकारी साझा करते हैं, मानो जनता को प्रताड़ित करना ही उनका मुख्य एजेंडा बन चुका हो।

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इस प्रशासनिक पंगुता ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की प्रशासनिक साख को पूरी तरह मटियामेट कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक अब यह थू-थू हो रही है कि यदि मुख्यमंत्री से खुद का ‘पावर’ (ऊर्जा विभाग) ही नहीं संभल रहा, तो उन्हें इस पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। जनता को भगवान भरोसे छोड़कर एसी कमरों में सो रहे मुखिया को यह साबित करना होगा कि क्या वे वाकई जनहित के लिए मुख्यमंत्री बने हैं, या फिर यह कुर्सी सिर्फ एक जागीर है।

अगर मुख्यमंत्री जनता की इस बुनियादी तकलीफ को दूर करने में नाकाम हैं, तो उन्हें तत्काल ऊर्जा विभाग से इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि नरक भोग रही जनता अब और खोखले आश्वासनों को बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

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