सूरजपुर । जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऑडिटोरियम तिलसिवां में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यशाला का उद्देश्य जल संरक्षण, भू-जल प्रबंधन एवं वैज्ञानिक खेती के प्रति जनप्रतिनिधियों को जागरूक करना था, ताकि वे अपने-अपने ग्राम पंचायत स्तर पर प्रभावी पहल कर सकें।
जल संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता-
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि पहले लोग नदी, नाले, तालाब और कुओं जैसे पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भर रहते थे, लेकिन इन स्रोतों के सूखने और कम होने से भूजल पर निर्भरता बढ़ी है। बोरिंग के बढ़ते चलन और अत्यधिक दोहन के कारण भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम जल का सीमित और विवेकपूर्ण उपयोग करें तथा उसके संरक्षण को प्राथमिकता दें। उन्होंने सरपंचों से अपील की कि वे शासन की जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, मृदा परीक्षण एवं सिंचाई प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं की जानकारी लेकर ग्रामवासियों तक पहुंचाएं। साथ ही जल उपलब्धता के अनुरूप फसल चयन एवं वैज्ञानिक खेती अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम में ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन’ की भी जानकारी दी गई।
भू-गर्भ वैज्ञानिकों ने दी तकनीकी जानकारी-
कार्यक्रम में केंद्रीय भू-जल बोर्ड रायपुर से पहुंचे भू-गर्भ वैज्ञानिक बी. अभिषेक एवं साईं प्रसन्ना ने ‘डेटा आधारित जलभृत प्रबंधन योजना अंतर्गत जल प्रबंधन से लाभकारी खेती’ विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अनियमित वर्षा, गिरते भूजल स्तर और बढ़ती सिंचाई मांग के कारण पारंपरिक जल प्रबंधन पद्धतियां अब पर्याप्त नहीं रह गई हैं। ऐसे में डेटा ड्रिवन वाटर प्लानिंग ही सतत कृषि का प्रभावी समाधान है। वैज्ञानिकों ने निम्न उपायों पर विशेष जोर दिया— चेक डैम एवं परकोलेशन टैंक निर्माण फार्म पॉन्ड विकसित करना, माइक्रो इरिगेशन (ड्रिप एवं स्पि्रंकलर), फसल विविधीकरण, वर्षा जल संचयन एवं रिचार्ज संरचनाएं, जल बजटिंग एवं जलवृत प्रबंधन। उन्होंने उपस्थित जनप्रतिनिधियों के सवालों का वैज्ञानिक तरीके से समाधान भी प्रस्तुत किया।
कलेक्टर और एसएसपी ने भी दिया मार्गदर्शन-
कलेक्टर एस. जयवर्धन ने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक जल संरक्षण की जानकारी पहुंचाना आवश्यक है। ग्राम पंचायतों में योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और विभागों के बीच समन्वय से बेहतर सेवा वितरण संभव है। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार ठाकुर ने कानून व्यवस्था, साइबर अपराध और सड़क सुरक्षा पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए ग्रामीणों को जागरूक करना आवश्यक है। उन्होंने नशामुक्ति अभियान, अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध सहयोग और हेलमेट पहनने के महत्व पर भी जोर दिया। किसी भी अपराध की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम नंबर 9575770004 पर देने की अपील की गई, जहां शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाता है।
विभागीय योजनाओं की दी गई जानकारी-
कार्यक्रम के अंत में ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’बनाने के लिए सभी उपस्थितजनों को शपथ दिलाई गई। कृषि,जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्वास्थ्य, वन, विद्युत, महिला एवं बाल विकास, उद्यान, आदिवासी विकास एवं मनरेगा विभाग के अधिकारियों ने योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती रेखा राजवाड़े, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती स्वाति संत सिंह, जिला पंचायत सदस्यगण, सरपंच एवं उपसरपंच, जिला पंचायत सीईओ विजेंद्र सिंह पाटले सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
जनभागीदारी से ही संभव होगा जल संरक्षण-
कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सामूहिक प्रयास से ही सफल हो सकता है। यदि ग्राम स्तर पर जल बजटिंग, वर्षा जल संचयन और वैज्ञानिक खेती को अपनाया जाए तो भविष्य में जल संकट से बचा जा सकता है। सूरजपुर में आयोजित यह कार्यशाला जल प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।



