भरत शर्मा की रिपोर्ट

युवा का संघर्ष इस सोच के साथ शुरू होता है कि वह श्रेष्ठ है , उसकी सफलता तय है – शिवम राठौड़

रतलाम/युवा साध्य की प्राप्ति के लिए साधनों का मोहताज नहीं होता , वह साध्य के संघर्ष में सुख पाता है , परिणाम से प्रभावित नहीं होता , परिणाम उसके लिए सामान्य घटना है । यह बात युवाम के संस्थापक पारस सकलेचा ने कहीं । आज युवाम सभागृह में युवा दिवस पर आयोजित समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे ।
सकलेचा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए अर्जुन की तरह सिर्फ लक्ष्य को देखना अच्छा है । लेकिन यह भी ध्यान रखें की अर्जुन से श्रेष्ठ एकलव्य था, जो साधनों का नहीं ,संघर्ष का प्रतीक था ।
सकलेचा ने कहां की अगर माताजी ने दूध लाने का बोला , और आपने 300 मीटर दूर दुकान तक जाने में विलंब इसलिए कर दिया की स्कूटर कोई ले गया था , तो यह मान के चलो कि आपका युवा मर गया है ।
सत्र संचालक शिवम राठौर ने कहा कि युवा का संघर्ष इस सोच के साथ शुरू होता है कि वह श्रेष्ठ है , और उसकी जीत तय है। जहां यह सोच नहीं हैं , वहां संघर्ष नहीं है । सफलता नहीं है समारोह को जितेन्द्र राठौर , हर्ष उपाध्याय तथा पार्थ पोरवाल ने भी संबोधित किया ।
इस अवसर पर उपस्थित विद्यार्थियों ने स्वामी विवेकानंद से संघर्ष की , तथा अर्जुन से समर्पण की , प्रेरणा प्राप्त कर वर्ष 2026 में हर हाल में चयनित होने का संकल्प लिया ।

