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योगी जी बच्चों का भविष्य है, खिलौना नहीं! UP में शत-प्रतिशत पुस्तक वितरण का दावा झूठा, कई स्कूलों में अब तक नहीं मिली किताबें, इसे सुशासन कहें या ‘कुशासन’?

Priyanshu Ranjan

बच्चे देश का भविष्य होते हैं, ये बात सुनने में तो बहुत अच्छी लगती है. असलियत तो कुछ और ही है. हालांकि, ये बात प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के मुंह से भी कई बार सुनने को मिली, लेकिन सीएम योगी के लिए केवल ये सियासी बयानबाजी तक ही सीमित है! उनको बच्चों के भविष्य से कोई लेना देना नहीं है. अगर ऐसा न होता तो उनकी सरकार और उनका सिस्टम गरीबों के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ न करता. नया सत्र हुए 10 दिन हो चुके हैं, लेकिन आगरा जिले के कई परिषदीय विद्यालयों में अब तक बच्चों को पाठ्यपुस्तक नहीं मिली है. लेकिन सिस्टम शत-प्रतिशत पाठ्यपुस्तक वितरण का खोखला दावा कर रहा है. ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या योगी सरकार दिखावे के लिए स्कूल चलो अभियान चला रही है? सरकार इसके जरिए केवल राजनीतिक लाभ लेना चाहती है?

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बता दें कि प्रदेश में नया स्कूली सत्र शुरू हो चुका है. सरकारी स्कूलों में घटती संख्या को देखते हुए योगी सरकार स्कूल चलो अभियान पर खासा तवज्जो दे रही है. लेकिन एक कड़वी हकीकत ये भी है कि अब तक कई स्कूलों में हजारों बच्चों को पाठ्यपुस्तक ही नसीब नहीं हुई है. अब ऐसे में बच्चों के परिजन परेशान नजर आ रहे हैं. किताबें न मिलने की वजह से बच्चों के भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है. हालांकि, शिक्षा विभाग शत-प्रतिशत पाठ्यपुस्तक वितरण का दावा कर रहा है. यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन ने भी बच्चों को अधिकांश विषयों की किताब न मिलने की बात कही है.

सवाल सरकार से

बच्चों को अब तक किताबें न मिलना सरकार के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है. जो योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के बड़े-बड़े दावे करती है, उसकी ही सरकार में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है. योगी सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पोस्टरों और विज्ञापनों में करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन योगी सरकार का ये प्रयास केवल पोस्टरों तक ही दिखता है, इसका जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या सरकार सिर्फ वोट बैंक के लिए बच्चों का भविष्य संवारना चाहती है? क्या चुनावी सीजन में ही इन बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की जाती है? क्या नौनिहालों का भविष्य केवल राजनीति रोटी सेंकने तक सीमित रह गया है?

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