अमेरिकी संसद में अगले सप्ताह एक बिल पेश होने वाला है. यह बिल पेश होने के बाद भारत और अमेरिकी रिश्तों में कड़वाहट आने की संभावना है. क्योंकि अगर यह बिल अमेरिका की संसद में पास हो जाता है तो भारत पर 500 फीसदी टैरिफ लग सकता है. इस बिल को पेश करने की वजह अमेरिका, रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करना चाहता है. बिल में कई कठोर प्रावधान हैं, जिसमें रूस से तेल, यूरेनियम या अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों के अमेरिकी आयात पर 500 प्रतिशत टैरिफ शामिल है. हालांकि भारत को लेकर कई बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह चुके हैं कि यदि भारत, रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका टैरिफ बढ़ा सकता है. टैरिफ को लेकर ट्रंप कई बार धमकियां दे चुके हैं.
अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “कई मुद्दों पर अहम बैठकों के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को भी मंजूरी दे ही है. इस विधेयक पर मैं महीनों से काम कर रहा हूं. इस विधेयक के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों को दंडित किया जाएगा. इसका भारत, चीन और ब्राजील पर तगड़ा असर पड़ सकता है.”
रूस से ऊर्जा खरीदने वालों पर लगेगा भारी-भरकम टैरिफ
अमेरिकी संसद में रूस के खिलाफ सख्त प्रतिबंध लगाने की तैयारियां की जा रही हैं. यह बिल यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया है. द्विदलीय बिल, जिसका नाम ‘रूस पर प्रतिबंध लगाने का अधिनियम 2025’ है. इस बिल को कई सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठकर कर संयुक्त रूप से तैयार किया है और व्हाइट हाउस ने भी इसे मंजूरी दे दी है. अगर यह बिल पास हो जाता है तो अमेरिका को अधिकार रहेगा कि वह रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगा सके.
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर पड़ेगा प्रभाव
अमेरिकी संसद में अगर इस बिल को मंजूरी दी जाती है तो रूस से तेल, गैस, यूरेनियम या अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों के अमेरिकी आयात पर 500 फीसदी टैरिफ लगाया जा सकता है. सांसद सीनेटर ग्राहम का मानना है कि इससे रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा. बता दें, यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से काफी मात्रा में सस्ता तेल खरीदकर अपनी एनर्जी सेक्टर को काफी मजबूत कर लिया है. अब नए बिल को लेकर चिंता जरूर हो गई है. क्योंकि इससे भारत को भारी-भरकम टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है. इससे भारत-अमेरिका के व्यापार संबंधों पर भी नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है.

