सूरजपुर । कलेक्टर एस. जयवर्धन ने शनिवार को तहसील भैयाथान का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नो-मैपिंग मतदाताओं की सुनवाई प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
भटगांव विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-05 अंतर्गत तहसील भैयाथान में कुल 44 नो-मैपिंग मतदाताओं को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए बुलाया गया था। इनमें से 25 मतदाताओं की सुनवाई पूर्ण कर ली गई है, जबकि शेष मतदाताओं की सुनवाई के लिए 05 जनवरी 2026 की तिथि निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर भी उपस्थित रहे ।
सुनवाई के दौरान प्राप्त दस्तावेजों को परीक्षण हेतु संबंधित पोर्टल पर अपलोड किया गया है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि नो-मैपिंग मतदाताओं से जुड़े मामलों का शीघ्र एवं नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित किया जाए । निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की भी समीक्षा की और उपस्थित अधिकारियों को सभी कार्य समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए।
क्या था पूरा मामला…
30 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन की हड़ताल के दौरान कुछ कर्मचारी कार्यालयीन समय में एमसीबी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने वहां कार्यरत कर्मचारियों से हड़ताल के समर्थन में शामिल होने का अनुरोध किया। इसे सरकारी कार्य में बाधा मानते हुए कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने तीन कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर दिया था । इस कार्रवाई को लेकर कर्मचारी संगठनों और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी।
प्रशासनिक बहस तेज…
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अनुशासन बनाए रखने की कार्रवाई प्रक्रिया से ऊपर हो सकती है? क्या जल्दबाज़ी में लिए गए फैसले प्रशासनिक अधिकारों को कमजोर करते हैं? और क्या एक आदेश के तुरंत बाद दूसरे आदेश से प्रशासनिक भ्रम की स्थिति बनती है? एमसीबी जिले की यह घटना अब केवल स्थानीय मामला नहीं रह गई है, बल्कि राज्य स्तर पर प्रशासनिक अनुशासन और विधिसम्मत प्रक्रिया के संतुलन की एक अहम मिसाल के रूप में देखी जा रही है।



