सूरजपुर : जिला कांग्रेस कमेटी सूरजपुर की नई विस्तार सूची जारी होते ही संगठन में असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पदाधिकारियों की नियुक्ति के महज़ तीन-चार दिन के भीतर कई नेताओं ने इस्तीफा दे दिया, जिससे जिला संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
नई सूची बनी विवाद की वजह
कांग्रेस द्वारा जारी नई जिला कमेटी सूची का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना बताया गया था, लेकिन परिणाम उल्टा दिख रहा है। नियुक्ति पत्रों से ज्यादा चर्चा अब इस्तीफा पत्रों की हो रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे संगठनात्मक असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
किन नेताओं ने दिया इस्तीफा?
इस्तीफा देने वालों में संयुक्त महामंत्री शिवनारायण गुप्ता, गोरखनाथ पाठक, राजेंद्र प्रसाद गुर्जर, जिला उपाध्यक्ष ऊषा सिंह, सचिव पुष्पेंद्र सिंह, कार्यकारिणी सदस्य सरोज माणिकपुरी, महामंत्री बिजेंद्र गोयल, सचिव पवन दीवान, संयुक्त महामंत्री सरिता सिंह और भावना सिंह सहित कई नाम शामिल हैं।
एक साथ इतने इस्तीफों ने यह संकेत दिया है कि मामला केवल व्यक्तिगत नाराजगी का नहीं बल्कि व्यापक संगठनात्मक असंतोष का है।
ऊषा सिंह का इस्तीफा बना चर्चा का केंद्र
जिला उपाध्यक्ष बनाई गईं ऊषा सिंह का इस्तीफा सबसे ज्यादा चर्चा में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रभावशाली नेताओं का असंतोष संगठन की आंतरिक स्थिति को दर्शाता है।
नेतृत्व पर उठ रहे सवाल
जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह के नेतृत्व को लेकर भी अंदरखाने असंतोष की चर्चा है। आरोप है कि निर्णय प्रक्रिया में संवाद और संतुलन की कमी रही। हालांकि आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन इस्तीफों की संख्या ने सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
विपक्ष को मिल सकता है फायदा
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि असंतुष्ट नेताओं को जल्द नहीं मनाया गया तो इसका सीधा लाभ विपक्षी दलों को मिल सकता है। संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने के बजाय जिला स्तर पर ही खींचतान दिखाई दे रही है।
प्रदेश नेतृत्व की अग्निपरीक्षा
अब नजर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर है। क्या शीर्ष नेतृत्व हस्तक्षेप कर संगठन में समन्वय स्थापित करेगा या सूरजपुर कांग्रेस में यह असंतोष आगे भी जारी रहेगा — यह आने वाला समय बताएगा।



