भरत शर्मा की रिपोर्ट

रतलाम/विगत दिनों जैन समाज द्वारा तथ्यों को तोड़ मरोड़कर तथा भड़काऊ भाषा का उपयोग कर एक सामान्य घटना की एक मनगढ़त कहानी बनाकर शांतिप्रिय समाजो मे अनावश्यक खाई पैदा करने की दुर्भावना से प्रशासन को ज्ञापन देकर शहरवासियों में भ्रान्ति उत्पन्न की गई। उस संदर्भ में सनातन समाज द्वारा रतलाम नगर के सम्माननीय नागरिकों के समक्ष हम स्पष्टीकरण कर रहे हैं।

बागड़ो का वास स्थित श्री चैमुखा महादेव मंदिर पर प्रतिवर्ष अनुसार महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर अभिषेक पूजन आरती के पश्चात परम्परानुरूप प्रसादी वितरण किया गया। प्रसादी को लेकर जो कुछ विघ्न संतोषी द्वारा अभक्ष्य शब्द का उपयोग किया गया, वह सरासर गलत एवं निंदनीय है। भोलेनाथ की प्रसादी थी जिसमे कलाकंद एवं आलू की चिप का उपयोग हम फरयाली मानकर उपवास में भी करते हैं। हमारा तो छप्पन भोग में भी आलू का प्रयोग शास्त्र अनुसार होता है। मंदिर मे स्थापित जैन देवी देवता की तरफ प्रसादी नहीं बाटी गई तथा पूर्ण अनुशासन के साथ उस तरफ न तो कोई गया और न ही किसी मूर्ति आदि से छेड़छाड़ करी। यह मौके पर उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वयं देखा। आयोजकों ने चैमुखा महादेव जो हमारे आदि देव हैं, उस तरफ ही प्रसादी बांटी। हम संपूर्ण नगरवासियों को स्पष्ट कराना चाहते हैं कि मंदिर का प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। मंदिर शासन के अंतर्गत है। उच्च न्यायालय के निर्णय अनुसार दोनों धर्म के अनुयायी अपने आराध्य देवी देवता की पूजा अर्चना करने हेतु स्वतंत्र हैं। यह बात श्री सनातन धर्मसभा एवं श्री महारूद्र यज्ञ समिति के अध्यक्ष अनिल कुमार झालानी ने कहीं ।
जैन समाज के प्रबुद्ध जनों से विनम्र निवेदन है कि आप भी सनातन धर्म के ही अंग हो आपकी पूजा प्रणाली भिन्न हो सकती है। हम सनातन धर्मी विश्व कल्याण की कामना करते हैं। हम वासुदेव कुटुंबकम वाले हैं। सर्वे भवंतु सुखीनः सिद्धांत वाले हैं। हमारी सोच संकीर्ण नहीं है। हमारे देवस्थान न्यास जैसे गढ़ कैलाश मंदिर आदि मंदिरों में अशोक चैटाला, अमित कटारिया आदि संरक्षक व ट्रस्टी है जो कि जैन है। और बड़े दुर्भाग्य का विषय है कि महादेव के आयोजन के खिलाफ ज्ञापन देने प्रशासन के पास गए। जबकि यह लोग हर साल गढ़ कैलाश में आलू चिप्स और साबूदाना आलू खिचड़ी प्रसाद में बाटते हैं। इन्हें स्पष्ट करना चाहिये कि यहां चैमुखा महादेव में उन्हें क्या आपत्ति है।
वास्तविक यह है कि एक दिन पहले ट्रस्ट अध्यक्ष जो कि उनके अन्य पदाधिकारी को खरी-खोटी सुना रहे थे उन राजेंद्र खाबिया ने अपने आपसी विवाद को इस तरफ मोड़ कर जैन सनातन समरसता तथा सद्भावना को बिगड़ने का कार्य किया। प्रसारित वीडियो की भाषा से यह प्रमाणित होता है। श्री ऋषभदेव जी हमारे शास्त्रों में तीर्थंकर हैं। हम बुद्ध को भी भगवान मानते है। नानक भी हमारें है। महावीर भगवान अकेले जैन समाज की बापौती नहीं है, सभी सनातनियों के लिये पूजनीय देव है। हर धर्म का आदर करना सनातनियों का मूल उद्देश्य है। आज समय हिंदू धर्म को बचाने का है। यह तभी हो सकता है जब सनातन धर्म बचेगा। आपस में द्वेष भाव रखेंगे तब हिंदू धर्म की रक्षा कैसे होगी।अतः आपसी मनमुटाव दूर कर अपनी राजनीतिक मत आकांक्षा धर्म में ना लावे।
ये रहे उपस्थित
पत्रकार वार्ता में सदस्य स्वामी १००८ श्री देवस्वरूपानन्द जी, श्री सुजानन्द जी महाराज, पंडित शिव शंकर जी दवे,अध्यक्ष अनिल झालानी,उपाध्यक्ष डॉ राजेंद्र शर्मा, महामंत्री नवनीत सोनी वरिष्ठ सदस्य रमेश व्यास,वरिष्ठ अधिवक्ता बालुलाल त्रिपाठी, पंडित हरीश चतुर्वेदी, पंडित संजय ओझा,राजेश दवे, पंडित रामचंद्र शर्मा,बंसीलाल शर्मा , बृजेन्द्र मेहता,कैलाश झालानी,जनक नागल,जुगल पंड्या ,नीलेश सोनी अदि अन्य पद अधिकारी उपस्थित थे।



