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रतलाम/बच्चों के साथ बड़े- बुजुर्ग भी शामिल हुए रामायण परीक्षा में

Priyanshu Ranjan

भरत शर्मा की रिपोर्ट

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रतलाम / 4 जनवरी 26 / श्रीराम भारतीय संस्कृति, परंपरा और आत्मा के केंद्र में हैं। उनके चरित्र को जानना अपनी सभ्यता, इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को समझना है, जिससे भावी पीढ़ी में आत्मगौरव और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। भावी पीढ़ी भगवान श्री राम के दिव्य चरित्र और कृतित्व को जाने- समझे और आचरण में उतारे। इसी पुनीत उद्देश्य को लेकर महाकवि श्री गोस्वामी तुलसीदास जी कृत श्रीरामचरितमानस पर केन्द्रित निशुल्क रामायण परीक्षा में रविवार को शहर के 50 से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए। जिसमे बच्चो से लेकर बड़ों तक ने उत्साह दिखाया।

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दो महीने से चल रहा था अभ्यास

श्री गीता रामायण परीक्षा समिति, गीता भवन स्वर्गाश्रम, ऋषिकेश द्वारा रतलाम के शास्त्री नगर स्थित पेसेफिक कोचिंग सेंटर पर निशुल्क रामायण परीक्षा दो चरणों में आयोजित हुई। रतलाम में परीक्षा संचालन – समन्वय अयोध्यानाथ मन्दिर,गढ़ कैलाश समिति द्वारा विगत दो माह से परीक्षार्थियों को तैयारी करवाई जा रही थी। प्रथम चरण में शिशु वर्ग और दुसरे चरण में प्रथम वर्ग के परीक्षार्थीयों ने परीक्षा दी। जिसमे बच्चों से लेकर बड़ो तक सभी ने उत्साह से भाग लिया। शिशु वर्ग के लिए किष्किन्धाकाण्ड और प्रथम वर्ग के लिए अरण्य – सुंदरकांड में से प्रश्न पूछे गये थे। प्रत्येक प्रश्न पत्र 100 अंकों का रहा। परीक्षार्थियों के लिए विगत दो माह से समिति की महिला पुरुष सदस्य अपने अपने क्षेत्र्रों में निशुल्क अध्यापन करवा रहे थे। परीक्षा परिणाम श्री गीता रामायण परीक्षा समिति, गीता भवन स्वर्गाश्रम, ऋषिकेश द्वारा मार्च में घोषित किये जायेंगे। उत्तीर्ण परीक्षार्थियों को प्रमाण पत्र दिए जायेंगे। जिसके बाद वे अगले चरण की परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

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इसलिए जरूरी है समझना

परीक्षा संचालन – समन्वय समिति के शैलेन्द्र सोनी, जगदीश बैरागी, संजय शर्मा, प्रशांत छाजेड, सुशील जैन आदि ने बताया कि समिति के सदस्य प्रतिवर्ष इस परीक्षा का आयोजन करते है। उन्होंने बताया कि हमारी भावी पीढ़ी को भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्र और कृतित्व को जानना-समझना इसलिए आवश्यक है क्योंकि उनका जीवन केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, आदर्श नेतृत्व और नैतिक जीवन का शाश्वत मार्गदर्शन है। आज के भौतिक और प्रतिस्पर्धात्मक युग में ईमानदारी, करुणा, सत्यनिष्ठा और आत्मसंयम जैसे मूल्य कमजोर पड़ते जा रहे हैं। श्रीराम का चरित्र इन मूल्यों को व्यवहार में उतारने की प्रेरणा देता है, केवल उपदेश नहीं। इसी पुनीत भावना को लेकर हम नई पीढ़ी को महाकवि श्री गोस्वामी तुलसीदास जी कृत श्रीरामचरितमानस से जोड़ते हुए परीक्षा का आयोजन करते है।

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