सूरजपुर:कुमेली वन विभाग रेस्ट हाउस के आपत्तिजनक वीडियो को लेकर मचा विवाद अब थमने के बजाय और तेज होता जा रहा है। मामला सामने आए अभी दो दिन ही हुए हैं, लेकिन अब इसमें छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री रामविचार नेताम का बयान सामने आने के बाद यह मुद्दा प्रशासनिक से ज्यादा राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले चुका है।
रामानुजनगर ब्लॉक स्थित कुमेली रेस्ट हाउस में कथित अश्लील डांस के वायरल वीडियो ने सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और शासकीय कर्मचारियों की जिम्मेदारी पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में डांसरों पर पैसे लुटाए जाने और प्रभावशाली लोगों की मौजूदगी के दावे ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया है।
- सूरजपुर:कुमेली वन विभाग रेस्ट हाउस के आपत्तिजनक वीडियो को लेकर मचा विवाद अब थमने के बजाय और तेज होता जा रहा है। मामला सामने आए अभी दो दिन ही हुए हैं, लेकिन अब इसमें छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री रामविचार नेताम का बयान सामने आने के बाद यह मुद्दा प्रशासनिक से ज्यादा राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले चुका है।
- मंत्री नेताम ने कहा…
- “कला तो कला है, इसमें केवल भजन या राम नाम जप ही शामिल नहीं होता।”
मंत्री का बयान बना विवाद की जड़
इस पूरे मामले पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री रामविचार नेताम ने जो कहा, वही अब विवाद का केंद्र बन गया है।
मंत्री नेताम ने कहा…
“कला तो कला है, इसमें केवल भजन या राम नाम जप ही शामिल नहीं होता।”
मंत्री का यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।
एक वर्ग इसे अश्लीलता का परोक्ष समर्थन मान रहा है
वहीं दूसरा वर्ग कह रहा है कि मंत्री के बयान ने मूल मुद्दे—सरकारी रेस्ट हाउस के दुरुपयोग—से ध्यान भटका दिया है
जन चर्चा का विषय
क्या सरकारी रेस्ट हाउस में इस तरह के कार्यक्रम को “कला” कहकर टाला जा सकता है?
और अगर यह निजी कार्यक्रम था, तो वह सरकारी परिसर में कैसे और किसकी अनुमति से हुआ?
वन विभाग और प्रशासन पर दबाव
मंत्री के बयान के बाद अब दबाव सीधे वन विभाग और जिला प्रशासन पर बढ़ गया है। सामाजिक संगठनों की मांग है कि:
बयानबाजी से पहले तथ्यों की जांच हो
रेस्ट हाउस की बुकिंग, अनुमति और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सार्वजनिक की जाए
दोषी चाहे जनप्रतिनिधि हो या कर्मचारी, कार्रवाई होनी चाहिए
वीडियो ही नहीं, सिस्टम भी सवालों के घेरे में
कुमेली रेस्ट हाउस मामला अब केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है। मंत्री के बयान ने इसे सरकारी मर्यादा, सांस्कृतिक मूल्यों और जवाबदेही की बहस में बदल दिया है।

