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6 महीने बाद भी नहीं बना गोबरी नदी का पुल, मंत्री के गृह क्षेत्र में जनता बेहाल…

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By Admin

सूरजपुर:विकास के बड़े-बड़े दावों और करोड़ों की घोषणाओं के बीच मंत्री जी के अपने ही विधानसभा क्षेत्र में एक टूटा हुआ पुल आज जनता के लिए गंभीर संकट बना हुआ है। 30 जून 2025 को गोबरी नदी पर बना पुल धराशायी हो गया था, लेकिन छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो स्थायी पुल के निर्माण की स्पष्ट दिशा तय हो सकी है और न ही अस्थायी समाधान के तौर पर प्रस्तावित वैकल्पिक रपटा पुल को स्वीकृति मिल पाई है।

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यह मामला अब सिर्फ एक पुल का नहीं, बल्कि सरकारी प्राथमिकता, संवेदनशीलता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है। जनता पूछ रही है—जब मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ही हालात ऐसे हैं, तो बाकी क्षेत्रों की स्थिति कैसी होगी?

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वैकल्पिक रपटा पुल भी अधर में

पुल टूटने के बाद प्रशासन ने तात्कालिक समाधान के तौर पर 15 लाख रुपये की लागत से वैकल्पिक रपटा पुल का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतनी छोटी राशि की स्वीकृति भी अब तक नहीं मिल सकी।

ग्रामीणों का सवाल सीधा है—अगर 15 लाख का रपटा पुल मंजूर नहीं हो पा रहा, तो स्थायी पुल की स्वीकृति में कितने साल लगेंगे?

निरीक्षण बहुत हुए, नतीजा शून्य

पुल टूटने के बाद कलेक्टर और संबंधित विभागों ने मौके का निरीक्षण किया। क्षेत्र की विधायक एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और उनके पति ठाकुर राजवाड़े ने भी कई बार स्थल निरीक्षण किया।

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लेकिन जनता पूछ रही है—निरीक्षण के बाद परिणाम क्या निकला?

स्वीकृति कहां अटकी है?

जिम्मेदारी किसकी है?

क्या निरीक्षण सिर्फ फोटो और आश्वासन तक सीमित रह गए?

विकास की बातें, लेकिन गृह क्षेत्र में बदहाली

जहां एक ओर विकास की गाथाएं सुनाई जा रही हैं, वहीं मंत्री के गृह क्षेत्र में लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबा चक्कर काटने को मजबूर हैं।

स्कूल, अस्पताल और बाजार—सब कुछ दूर हो गया है। आने वाली बरसात को लेकर ग्रामीणों में डर है कि कहीं फिर से जान जोखिम में डालकर नदी पार न करनी पड़े।

150 करोड़ की स्वीकृतियां, पर गोबरी नदी के लिए पैसा नहीं?

हाल ही में क्षेत्र को 150 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृतियों की खबरें आईं। ऐसे में सवाल और भी गंभीर हो जाता है—

क्या सरकार के पास गोबरी नदी पर पुल बनाने के लिए पैसा नहीं है?

या फिर यह पुल प्राथमिकता सूची में ही नहीं है?

जब सरकार चुप रही, तो जनता आगे आई

सरकारी देरी से परेशान होकर ग्रामीणों ने जन सहयोग से रपटा पुल बनाने की कोशिश की। लेकिन बिना तकनीकी सहयोग और स्थायी समाधान के यह व्यवस्था भी अब जर्जर हालत में पहुंच चुकी है।

न मरम्मत हो रही है, न ही कोई जिम्मेदार नजर आ रहा है।

जनता के सीधे सवाल, जिनका जवाब जरूरी

पुल टूटे 6 महीने बीत गए—अब तक क्या ठोस प्रगति हुई?

वैकल्पिक रपटा पुल की स्वीकृति किस फाइल में अटकी है?

स्थायी पुल के निर्माण की टाइमलाइन क्या है?

क्या मंत्री जी खुद बता पाएंगी कि यह पुल कब बनेगा?

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अब गोबरी नदी का यह पुल भाषणों और निरीक्षणों से आगे बढ़ेगा या नहीं—इसका जवाब जनता इंतजार में है।

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