AAJ24

[state_mirror_header]

बड़ी ख़बर: “दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: तब्लीगी जमात से जुड़ी 16 एफआईआर खारिज, ‘न्याय के लिए आधारहीन'”

Admin
By Admin
Oplus_16908288

“कोविड-19 के दौरान तब्लीगी जमात के खिलाफ दर्ज आरोपपत्र रद्द, कोर्ट ने कहा- केवल आश्रय देना अपराध नहीं”

18 जुलाई 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान तब्लीगी जमात के निजामुद्दीन मरकज कार्यक्रम से जुड़े 70 भारतीयों के खिलाफ दर्ज 16 प्राथमिकियों (एफआईआर) को निरस्त कर दिया।

- Advertisement -

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि ये नागरिक केवल विदेशी व्यक्तियों को ठहरने की सुविधा दे रहे थे, जो दिल्ली सरकार की तत्कालीन निषेधाज्ञा का उल्लंघन नहीं था। कोर्ट ने माना कि निषेधाज्ञा धार्मिक आयोजनों पर थी, न कि मस्जिदों या निजी स्थानों पर आश्रय प्रदान करने पर।

- Advertisement -

इसलिए, इन आरोपपत्रों को बनाए रखना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। आपके मूल बयान में “मोदी सरकार और डागी मीडिया” पर टिप्पणी और “शर्म निरपेक्ष” का उल्लेख एक व्यक्तिगत दृष्टिकोण को दर्शाता है। एक्स पर कुछ यूजर्स ने भी ऐसी राय व्यक्त की है, जिसमें सरकार और कुछ मीडिया संस्थानों पर तब्लीगी जमात को जानबूझकर बदनाम करने का आरोप लगाया गया।

हालांकि, ये दावे सबूतों के बजाय भावनाओं पर आधारित हैं और कोर्ट का फैसला इन रायों को न तो समर्थन देता है न ही खारिज करता है। कोर्ट का निर्णय विशुद्ध रूप से कानूनी तर्कों पर टिका है, जिसमें सबूतों की कमी और निषेधाज्ञा की व्याख्या मुख्य आधार रहे। क्या आप इस खबर को किसी अन्य न्यूज चैनल के स्टाइल में या किसी विशेष पहलू, जैसे कानूनी निहितार्थ या सामाजिक प्रभाव, पर और विस्तार चाहेंगे?

See also  आपकी संपत्ति पर ऐसी क्या आफत आई कि CJI समेत 9 जजों की संविधान पीठ को देना पड़ा फैसला? समझिए
Share This Article