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महिला आरक्षण के नाम पर भाजपा पूरे देश में फैला रही है भ्रम- शशि सिंह,

Priyanshu Ranjan

सूरजपुर । देश में महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष शशि सिंह ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया है कि वह महिला आरक्षण के नाम पर पूरे देश में भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। जारी बयान में उन्होंने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण के मुद्दे को वास्तविक रूप से लागू करने के बजाय उसे एक राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जबकि कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण की प्रबल समर्थक रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा द्वारा यह प्रचारित करना कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया, पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है। उनके अनुसार वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है और जनता को भ्रमित करने के लिए इस प्रकार की बातें सामने लाई जा रही हैं।

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम पहले ही बन चुका है कानून

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शशि सिंह ने कहा कि महिला आरक्षण बिल, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (106 वां संविधान संशोधन) के नाम से जाना जाता है, संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुका है। इस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर भी हो चुके हैं और यह विधेयक अब कानून का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि जब यह कानून पहले ही पारित हो चुका है, तो यह कहना कि विपक्ष के कारण महिला आरक्षण लागू नहीं हो सका, पूरी तरह गलत है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस कानून के लागू होने की समय सीमा भविष्य की जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ी हुई है, जिससे इसके तत्काल प्रभाव में आने में देरी हो रही है।

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131वां संविधान संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने 16 अप्रैल 2026 को संसद में प्रस्तुत 131 वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को महिला आरक्षण के नाम पर प्रस्तुत किया गया, जबकि इसका मुख्य उद्देश्य परिसीमन से जुड़े प्रावधानों को आगे बढ़ाना था। उन्होंने बताया कि इस विधेयक में लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव शामिल था, जिसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित की जानी थीं।इसके अलावा, परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात भी कही गई थी। शशि सिंह के अनुसार कई राज्यों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई, क्योंकि उनका मानना था कि पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करना उचित नहीं है।

कांग्रेस का दावाः महिला आरक्षण की हमेशा रही समर्थक

शशि सिंह ने अपने बयान में कांग्रेस के ऐतिहासिक योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कांग्रेस ने हमेशा पहल की है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि 1989 में उन्होंने पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के लिए एक- तिहाई आरक्षण का प्रस्ताव रखा था। हालांकि उस समय यह विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं हो सका था। इसके बाद पी. वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल में 1993 में यह प्रस्ताव पुनः लाया गया और अंततः कानून का रूप ले सका। इसी प्रकार डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण के लिए विधेयक लाया गया, जो 2010 में राज्यसभा में पारित हुआ। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का ही परिणाम है कि आज देशभर में पंचायतों और नगर निकायों में लाखों महिला जनप्रतिनिधि सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

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पुरानी जनगणना के आधार पर परिसीमन पर सवाल

शशि सिंह ने कहा कि जब देश में नई जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है और जातिगत जनगणना की भी चर्चा हो रही है, तो 2011 के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन कराना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार नई जनगणना के आंकड़ों का इंतजार क्यों नहीं करना चाहती। उनके अनुसार परिसीमन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को अद्यतन आंकड़ों के आधार पर ही किया जाना चाहिए, ताकि सभी राज्यों और क्षेत्रों के साथ न्याय हो सके।

महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग…

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिला आरक्षण को लागू करना चाहती है, तो इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि वर्तमान लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा सकता है। इसके लिए किसी अतिरिक्त परिसीमन की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल इस प्रस्ताव के समर्थन में हैं और सरकार यदि चाहे तो तत्काल प्रभाव से महिला आरक्षण लागू कर सकती है।

परिसीमन बनाम आरक्षण : असली मुद्दा क्या?

शशि सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण को ‘मुखौटा’ बनाकर परिसीमन से जुड़े अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना इसकी प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा कर देता है। यदि सरकार की मंशा साफ होती, तो वह इस कानून को संशोधित कर तत्काल लागू कर सकती थी।उनके अनुसार विपक्षी दलों की एकजुटता के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका और यही कारण है कि अब भाजपा इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।

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राजनीतिक बहस के बीच जनता की अपेक्षाएं…

महिला आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से देश की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। इसे महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। हालांकि इसे लागू करने की प्रक्रिया और उससे जुड़े राजनीतिक विवाद लगातार इसे केंद्र में बनाए हुए हैं। जनता की अपेक्षा है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक दल आपसी आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर ठोस निर्णय लें, ताकि महिलाओं को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

मुद्दा गंभीर, समाधान की जरूरत…

कांग्रेस और भाजपा के बीच महिला आरक्षण को लेकर जारी यह बहस इस बात का संकेत है कि यह मुद्दा केवल कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक पहलू भी जुड़े हुए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर भ्रम फैला रही है, जबकि भाजपा इसे अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि इस विषय पर स्पष्टता लाई जाए और महिलाओं के हित में जल्द से जल्द प्रभावी निर्णय लिया जाए। फिलहाल,यह मुद्दा राजनीतिक मंचों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है, लेकिन असली सवाल यही है महिला आरक्षण का वास्तविक लाभ महिलाओं तक कब पहुंचेगा?

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