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भैयाथान सहकारी बैंक गबन प्रकरण: विभागीय बर्खास्तगी कार्रवाई न्यायालय ने की शून्य, प्रक्रिया पर उठे सवाल…

Bharat Sharma

सूरजपुर। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर की भैयाथान शाखा में वर्ष 2019–20 में किसानों की फसल बीमा राशि से जुड़े लगभग 35 लाख 78 हजार रुपये के कथित गबन मामले में नया मोड़ आ गया है।

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न्यायालय संयुक्त पंजीयन सहकारी संस्था, सरगुजा संभाग अंबिकापुर ने 23 जनवरी 2026 को बैंक द्वारा चार कर्मचारियों के खिलाफ की गई विभागीय सेवा समाप्ति की कार्रवाई को प्रक्रिया संबंधी त्रुटियों के आधार पर शून्य घोषित कर दिया है।

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क्या है पूरा मामला?

वर्ष 2019–20 में फसल बीमा राशि के फर्जी आहरण की शिकायत पर कलेक्टर सूरजपुर ने जांच दल गठित किया था। जांच में शाखा प्रबंधक जगदीश कुशवाहा, लिपिक सूबेदार सिंह, संस्था प्रबंधक रामकुमार सिंह और कर्मचारी सुनील यादव के नाम सामने आए। रिपोर्ट में करीब 35.78 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का उल्लेख किया गया था।

जांच के बाद बैंक प्रबंधन ने चारों को निलंबित किया, एफआईआर दर्ज कराई और 5 जून 2023 को सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया।

न्यायालय ने क्या कहा?

करीब तीन साल बाद मामला संयुक्त पंजीयन न्यायालय पहुंचा। न्यायालय ने माना कि विभागीय जांच में सेवा नियम 1982 और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूर्ण पालन नहीं हुआ। आरोपों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय नहीं की गई और संबंधित पक्ष को पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

इसी आधार पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई को शून्य घोषित किया गया। हालांकि न्यायालय ने यह नहीं कहा कि घोटाला नहीं हुआ, बल्कि बैंक को नियमों के अनुसार दोबारा कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी है।

अब क्या होंगे आगे के कदम?

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आपराधिक मामला (एफआईआर) अभी प्रभावी माना जा रहा है।

विभागीय कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है।

किसानों की फसल बीमा राशि की वसूली और जिम्मेदारी तय करने का सवाल अब भी बना हुआ है।

मामले को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि प्रक्रिया में त्रुटि थी तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी, और यदि गबन हुआ है तो दोषी कौन तय करेगा?

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