जून 2024 के लोकसभा चुनाव नतीजों के दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी। 4 जून को बीएसई सेंसेक्स लगभग 4,390 अंक (लगभग 5.74 प्रतिशत) गिरकर बंद हुआ और निफ्टी करीब 5.93 प्रतिशत लुढ़का। बाजार पूंजीकरण में लगभग ₹30 लाख करोड़ की गिरावट दर्ज की गई। यह चार साल में सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट में से एक थी।
इस घटना के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 6 जून 2024 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे “भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा घोटाला” बताया और संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच की मांग की। उनके मुख्य आरोप इस प्रकार थे:
मई 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एनडीटीवी के साक्षात्कार में कहा था कि “4 जून से पहले शेयर खरीद लें, बाजार चढ़ेगा”। उन्होंने स्थिर सरकार आने पर बाजार के बेहतर प्रदर्शन की बात कही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चुनाव प्रचार के दौरान बाजार के रिकॉर्ड तोड़ने संबंधी आशावादी बयान दिए थे।
एग्जिट पोल ने एनडीए को 350-400 सीटों के आसपास भारी बहुमत का अनुमान लगाया था, जबकि वास्तविक नतीजों में एनडीए को लगभग 293 सीटें मिलीं और बीजेपी को अकेले 272 का आंकड़ा पार नहीं कर सका। एग्जिट पोल काफी हद तक गलत साबित हुए। 3 जून को एग्जिट पोल के बाद बाजार में उछाल आया था, जबकि 4 जून को नतीजों के साथ गिरावट हुई।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि नेताओं का आम निवेशकों को सीधे निवेश सलाह देना उचित था या नहीं, और दोनों प्रमुख साक्षात्कार अडानी समूह से जुड़े मीडिया आउटलेट पर दिए गए थे (अडानी समूह पहले से सेबी जांच के दायरे में रहा है)। उन्होंने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट मुख्य रूप से एग्जिट पोल और वास्तविक नतीजों के बीच अंतर के कारण हुई। निवेशकों ने बड़े बहुमत की उम्मीद में पोजीशन ली थी, जो पूरी नहीं हुई। बीजेपी ने इन आरोपों का खंडन किया। वरिष्ठ नेता पीयूष गोयल ने कहा कि बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है और ट्रेडिंग में भारतीय निवेशकों को फायदा भी हुआ। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को हार के बाद का राजनीतिक हमला बताया।
मुख्य सवाल जो उठे:
क्या सत्ताधारी नेताओं का टीवी पर आम जनता को शेयर खरीदने की सलाह देना उचित था?
एग्जिट पोल इतने गलत क्यों निकले और क्या उनकी कोई जांच होनी चाहिए?
₹30 लाख करोड़ की बाजार पूंजी हानि (जिसमें रिटेल निवेशक भी शामिल थे) की जवाबदेही किसकी?
क्या जेपीसी जैसी स्वतंत्र जांच की जरूरत है?
अभी तक कोई आधिकारिक जेपीसी गठित नहीं हुई है और सेबी या अन्य एजेंसियों द्वारा इस घटना को “घोटाला” साबित करने वाली कोई निष्कर्ष रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। बाजार बाद में स्थिर हुआ और दीर्घकालिक रुझान अलग रहे।
स्रोत: एनडीटीवी, लाइवमिंट, टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिंदू, द इंडियन एक्सप्रेस, रॉयटर्स, बिजनेस स्टैंडर्ड और अन्य समाचार रिपोर्ट्स।