सूरजपुर। जिले में पिछले करीब पखवाड़े से जारी बारिश अब ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों के लिए आफत बनती जा रही है। शिवप्रसादनगर क्षेत्र में लगातार बारिश के चलते दर्जनभर ग्रामीणों के कच्चे और छप्परपोश मकान धराशाई होने की जानकारी सामने आई है। कई अन्य मकान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर जर्जर स्थिति में पहुंच गए हैं। मकान गिरने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने, घरेलू सामान सुरक्षित रखने और बारिश से बचने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
लगातार बारिश के कारण कच्चे मकानों की दीवारों में नमी बढ़ने और मिट्टी कमजोर होने से कई घर अचानक ढह गए। जिन परिवारों के आशियाने पूरी तरह गिर चुके हैं, उनके लिए तत्काल सुरक्षित आश्रय और आर्थिक सहायता की जरूरत महसूस की जा रही है।
इन ग्रामीणों के मकान हुए प्रभावित
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत शिवप्रसादनगर के गढ़ीपारा निवासी शिव प्रसाद कुशवाहा का मकान बारिश से प्रभावित हुआ है। वहीं ग्राम पंचायत बड़सरा में नागेश्वर चक्रधारी, कमलेश्वर साहू और स्वर्गीय हरि चक्रधारी के मकानों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है।
इसी क्षेत्र में भाजपा मंडल अध्यक्ष सुनील साहू के ब्रिक्स प्लांट के भी बारिश से प्रभावित होने की बात सामने आई है।
ग्राम पंचायत बस्कर में रामचंद्र, मनिजर और बालम सिंह के मकान बारिश के कारण गिरने की जानकारी है। वहीं कुर्रीडीह निवासी सुमित्रा सिंह और गुलाल सिंह के घर भी प्रभावित बताए गए हैं।
दनौली में होलसाय राजवाड़े और भैयालाल राजवाड़े के छप्परपोश मकान गिरने की जानकारी सामने आई है।
इन घटनाओं के बाद प्रभावित परिवारों के सामने तत्काल रहने की व्यवस्था का संकट खड़ा हो गया है। कई परिवारों के पास बारिश से बचने के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने की बात कही जा रही है।
‘गांव चलो, बस्ती चलो’ अभियान में सामने आई जमीनी हकीकत
ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता रक्षेन्द्र प्रताप सिंह को प्रभावित परिवारों की स्थिति की जानकारी मिली। उन्होंने मामले को जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाते हुए क्षेत्र की विधायक एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को आवेदन देकर प्रभावित परिवारों को प्राकृतिक आपदा राहत के तहत नियमानुसार मुआवजा राशि उपलब्ध कराने की मांग की है।
उन्होंने जिला पंचायत सदस्य अखिलेश प्रताप सिंह को भी दूरभाष के माध्यम से प्रभावित परिवारों की स्थिति से अवगत कराया और तत्काल राहत उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
रक्षेन्द्र प्रताप सिंह का कहना है कि जिन परिवारों के मकान पूरी तरह गिर चुके हैं, उनके सामने केवल मकान दोबारा बनाने की चुनौती नहीं है, बल्कि बारिश के बीच परिवार और घरेलू सामान को सुरक्षित रखना भी बड़ी समस्या बन गया है। ऐसे में प्रशासन को बिना देरी किए मौके पर पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन करना चाहिए।
बारिश थमने के बाद भी बना रहेगा खतरा
ग्रामीण इलाकों में कच्चे और छप्परपोश मकानों के लिए लगातार बारिश बेहद खतरनाक साबित हो रही है। दीवारों में नमी आने और मिट्टी कमजोर होने के बाद मकानों के अचानक गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में जिन घरों में फिलहाल केवल दरारें या आंशिक क्षति दिखाई दे रही है, उन्हें भी सुरक्षित मानना जोखिम भरा हो सकता है।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि प्रशासन को क्षतिग्रस्त मकानों का तत्काल सर्वे कराकर वास्तविक स्थिति दर्ज करनी चाहिए, ताकि पात्र परिवारों को समय पर राहत मिल सके और संभावित हादसों को रोका जा सके।
प्रशासन से पंचनामा और मुआवजे की मांग
मामला जनप्रतिनिधियों तक पहुंचने के बाद अब प्रभावित परिवारों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर है। ग्रामीणों की मांग है कि राजस्व अमला मौके पर पहुंचकर प्रत्येक क्षतिग्रस्त मकान का पंचनामा तैयार करे, नुकसान का वास्तविक आकलन करे और पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार प्राकृतिक आपदा राहत राशि उपलब्ध कराए।
विशेषकर जिन परिवारों के मकान पूरी तरह धराशाई हो चुके हैं, उनके लिए राहत में देरी मुश्किलें और बढ़ा सकती है। इसलिए ग्रामीणों ने कागजी प्रक्रिया तक सीमित रहने के बजाय मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लेने और शीघ्र राहत उपलब्ध कराने की मांग की है।
2 सितंबर की समीक्षा बैठक में मंत्री ने दिए थे मैदानी मॉनिटरिंग के निर्देश
गौरतलब है कि 2 सितंबर को महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सूरजपुर और भैयाथान में आयोजित विकासखंड स्तरीय समीक्षा बैठकों में अधिकारियों को योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने तथा मैदानी स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए थे।
अब शिवप्रसादनगर क्षेत्र में बारिश से प्रभावित परिवारों की स्थिति सामने आने के बाद देखना होगा कि प्रशासन इन मामलों में कितनी तेजी से मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन करता है और पात्र परिवारों को राहत उपलब्ध कराता है।




