निष्पक्ष जांच और संदेह के दायरे में बताए जा रहे लोगों की भूमिका की जांच की मांग; पुलिस चार आरोपियों को कर चुकी है गिरफ्तार,
अम्बिकापुर। कांग्रेस मंडल अध्यक्ष गुरुप्रीत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी गुरुप्रीत कौर सिद्धू के साथ हुई मारपीट का मामला अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। घटना के बाद सोमवार को सरगुजा जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
- निष्पक्ष जांच और संदेह के दायरे में बताए जा रहे लोगों की भूमिका की जांच की मांग; पुलिस चार आरोपियों को कर चुकी है गिरफ्तार,
- चार आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी
- गुरुप्रीत सिंह सिद्धू रायपुर रेफर
- भाजपा नेता प्रकाश साहू पर आरोप, उन्होंने किया इनकार
- रासुका की मांग भी उठाई
- कांग्रेस की मांग—जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित न रहे
- विवाद की शुरुआत वाहन खड़ा करने को लेकर होने की बात
- पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
- कानून-व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
- अब आगे क्या?
कांग्रेस ने मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने, घटना में संदेह के दायरे में बताए जा रहे अन्य लोगों की भूमिका की जांच करने तथा जांच में उनकी संलिप्तता सामने आने पर एफआईआर में आवश्यक रूप से नाम जोड़ने की मांग की है।
29 अगस्त की रात मणिपुर थाना क्षेत्र के दर्रीपारा में हुई मारपीट के मामले में पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है। उपलब्ध पुलिस संबंधी रिपोर्टों के अनुसार मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें कुछ लोगों द्वारा मारपीट करते दिखाई देने की बात सामने आई है।
चार आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी
पुलिस के अनुसार घटना के संबंध में प्रकरण दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों में बताया गया है कि पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और घटना में शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है।
पुलिस जांच के दौरान घटना के सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में आगे की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना में कुल कितने लोग शामिल थे और प्रत्येक की क्या भूमिका थी।
गुरुप्रीत सिंह सिद्धू रायपुर रेफर
हमले में घायल गुरुप्रीत सिंह सिद्धू को प्रारंभिक उपचार के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया था। बाद में बेहतर उपचार के लिए उन्हें रायपुर रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई थी। मीडिया रिपोर्टों में उनके सिर और आंख में चोट लगने का उल्लेख है।
घटना के दौरान बीच-बचाव करने पहुंचीं उनकी पत्नी गुरुप्रीत कौर सिद्धू के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है। घटना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मणिपुर थाने पहुंचे थे।
भाजपा नेता प्रकाश साहू पर आरोप, उन्होंने किया इनकार
गुरुप्रीत सिंह सिद्धू की ओर से भाजपा नेता प्रकाश साहू पर हमले के पीछे भूमिका होने का आरोप लगाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि घटना में शामिल बताए जा रहे कुछ लोगों के प्रकाश साहू से संबंध होने के कारण उनकी भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।
हालांकि, यह आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं। भाजपा नेता प्रकाश साहू ने हमले में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है और आरोपों को राजनीतिक रंजिश से प्रेरित बताया है। इसलिए इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
रासुका की मांग भी उठाई
कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रकाश साहू के पुराने आपराधिक मामलों का हवाला देते हुए उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की मांग रखी है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि विपक्षी दल के नेताओं और राजनीतिक पदाधिकारियों को सुरक्षा का भरोसा मिलना चाहिए तथा कानून-व्यवस्था के मामले में किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं होना चाहिए।
हालांकि रासुका के तहत कार्रवाई होगी या नहीं, यह पूरी तरह संबंधित पुलिस एवं प्रशासनिक प्रक्रिया तथा उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
कांग्रेस की मांग—जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित न रहे
एसपी को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने मांग की कि जांच को केवल गिरफ्तार किए गए आरोपियों तक सीमित नहीं रखा जाए। घटना से पहले और बाद में आरोपियों के संपर्क, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन और घटनास्थल पर मौजूद लोगों की भूमिका की भी जांच की जाए।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
विवाद की शुरुआत वाहन खड़ा करने को लेकर होने की बात
उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार घटना से पहले वाहन खड़ा करने को लेकर विवाद शुरू होने की बात सामने आई है। इसके बाद कहासुनी बढ़ी और कई लोग मौके पर पहुंचे। दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से इसे सुनियोजित हमला बताया जा रहा है।
यही वजह है कि अब पुलिस जांच में घटनाक्रम की पूरी कड़ी महत्वपूर्ण हो गई है। सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद किस तरह बढ़ा और इसमें किसकी क्या भूमिका रही।
पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि घटना केवल तत्काल हुए विवाद और मारपीट तक सीमित थी या इसके पीछे कोई पूर्व नियोजित योजना भी थी। कांग्रेस जहां इसे राजनीतिक हमले के रूप में देख रही है, वहीं दूसरे पक्ष की ओर से राजनीतिक रंजिश के आरोपों से इनकार किया गया है।
ऐसे में निष्पक्ष जांच ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है। पुलिस के सामने गिरफ्तार आरोपियों के साथ-साथ अन्य संदिग्धों की भूमिका, घटना का कारण और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच अहम होगी।
कानून-व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि घटना को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि शहर में किसी भी प्रकार की दबंगई या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर कानून व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश न हो।
कांग्रेस ने यह भी संकेत दिया है कि ऐसे मामलों को विधानसभा में भी उठाया जाएगा।
अब आगे क्या?
फिलहाल पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी बताई गई है। वहीं कांग्रेस ने एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मामले में अन्य संदिग्ध लोगों की भूमिका की भी जांच करने की मांग की है।
अब निगाहें पुलिस की आगे की कार्रवाई पर हैं। जांच में सीसीटीवी, मेडिकल रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। भाजपा नेता प्रकाश साहू पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि या खंडन भी जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगा।




