मुख्यमंत्री की मौजूदगी में CMDC और रविशंकर विश्वविद्यालय के बीच समझौता, स्थानीय युवाओं को मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण,
रायपुर। बस्तर की खनिज संपदा को स्थानीय रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़ने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बीजापुर के कुचनूर में करीब 25 वर्षों बाद दोबारा शुरू हुए कोरंडम खनन को अब स्थानीय स्तर पर कटिंग, पॉलिशिंग, आभूषण निर्माण और ब्रांडिंग से जोड़ने की तैयारी है।
इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में नया रायपुर के मेफेयर रिजॉर्ट में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (CMDC) और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के बीच एमओयू हुआ। समझौते के तहत विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है।
विश्वविद्यालय द्वारा स्थानीय युवाओं और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे कोरंडम की पहचान, कटिंग, पॉलिशिंग और अन्य जेम्स्टोन वैल्यू एडिशन गतिविधियों में स्थानीय स्तर पर दक्ष मानव संसाधन तैयार हो सके।
फरवरी 2025 से कुचनूर में हो रहा उत्खनन
बीजापुर जिले के भोपालपट्टनम क्षेत्र के ग्राम कुचनूर में CMDC और मेसर्स एन.सी. नाहर के संयुक्त उपक्रम छत्तीसगढ़ कोरंडम माइन्स लिमिटेड के माध्यम से फरवरी 2025 से कोरंडम खदान का संचालन फिर शुरू किया गया है।
वैज्ञानिक पद्धति से किए जा रहे उत्खनन के बाद वर्तमान में करीब 240 किलोग्राम कोरंडम का भंडारण है। इसमें से 157.643 किलोग्राम का परिवहन किया जा चुका है। परिवहन किए गए खनिज में 107.989 किलोग्राम बी-ग्रेड और 49.654 किलोग्राम औद्योगिक ग्रेड कोरंडम शामिल है।
खनिज के साथ रोजगार का भी विस्तार
कोरंडम खदान के संचालन से अब तक 14 स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर मिले हैं। सरकार की कोशिश है कि बस्तर की खनिज संपदा का लाभ केवल खनन तक सीमित न रहे। इसके लिए स्थानीय युवाओं, शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों को खनिज आधारित पूरी वैल्यू चेन में भागीदार बनाया जा रहा है।
कटिंग-पॉलिशिंग का प्रशिक्षण मिलने के बाद स्थानीय युवा कोरंडम के मूल्य संवर्धन से जुड़कर नौकरी के साथ अपना कारोबार भी शुरू कर सकेंगे।
बस्तर ब्रांड से जुड़ेंगे कोरंडम के उत्पाद
कुचनूर के कोरंडम को ‘बस्तर ब्रांड’ के तहत बाजार में पहचान दिलाने की योजना है। स्थानीय डिजाइन और गुणवत्ता के साथ कोरंडम से आभूषण एवं रत्न उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इसके बाद इनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर दिया जाएगा।
इस पहल से बस्तर की प्राकृतिक संपदा को स्थानीय कला, शिल्प और उद्यमिता से जोड़ने के साथ बाजार का विस्तार करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
कोरंडम के नए भंडारों की तलाश
बीजापुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कोरंडम के संभावित भंडारों की पहचान और अन्वेषण भी जारी है। कुचनूर के अलावा अन्य संभावित क्षेत्रों में खनन विस्तार की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। धनगोल सहित विभिन्न क्षेत्रों को आरक्षित कर आवेदन प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
उत्खनित कोरंडम की पारदर्शी नीलामी के जरिए राज्य को राजस्व प्राप्त होने के साथ बस्तर के कोरंडम को देश और विदेश में पहचान दिलाने की दिशा में भी काम होगा।
सरकार और CMDC की इस पहल का व्यापक उद्देश्य ‘खनन से मूल्य संवर्धन, मूल्य संवर्धन से रोजगार और रोजगार से आर्थिक सशक्तिकरण’ की अवधारणा को धरातल पर उतारना है, ताकि बस्तर की खनिज संपदा स्थानीय समृद्धि और आत्मनिर्भरता का आधार बन सके।




