सूरजपुर । शिक्षा विभाग में वर्षों से ‘व्यवस्था’ के नाम पर चल रही गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की अनौपचारिक पदस्थापना व्यवस्था पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) लता बेक ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है।
शासन द्वारा संलग्नीकरण समाप्त किए जाने के बावजूद जिला एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में कर्मचारियों से कार्य कराए जाने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद डीईओ ने सख्त आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई भी गैर- शैक्षणिक कर्मचारी अपनी मूल पदस्थ संस्था छोड़कर अन्य कार्यालय में कार्य नहीं करेगा।
डीईओ द्वारा 31 जुलाई 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि सभी गैर- शैक्षणिक कर्मचारियों को 3 अगस्त 2026 से अपनी मूल पदस्थ संस्था अथवा कार्यालय में उपस्थित होकर वहीं से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करनी होगी। आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम,1965 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बीईओ कार्यालयों को लेकर मिल रही थीं लगातार शिकायतें-
सूत्रों के अनुसार, सबसे अधिक शिकायतें विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय सूरजपुर और रामानुजनगर से सामने आ रही थीं। आरोप थे कि कुछ लिपिक और गैर- शैक्षणिक कर्मचारी अपनी मूल संस्था में केवल ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराते थे, जबकि पूरे दिन बीईओ कार्यालयों में कार्य करते थे। इससे उनकी मूल संस्थाओं का कार्यालयीन कार्य प्रभावित हो रहा था और शासन के आदेशों की भावना पर भी सवाल उठ रहे थे।
पूर्व के सभी व्यवस्था आदेश स्वतः निरस्त-
डीईओ के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिला कार्यालय अथवा अन्य कार्यालयों में किसी भी प्रकार की ‘व्यवस्था’ के तहत कार्य कराने संबंधी पूर्व में जारी सभी आदेश स्वतः निरस्त माने जाएंगे। इसका अर्थ है कि अब कोई भी कर्मचारी पूर्व व्यवस्था का हवाला देकर अन्य कार्यालय में कार्य नहीं कर सकेगा।
ऑनलाइन उपस्थिति भी मूल संस्था से होगी-
आदेश के अनुसार, केवल ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराकर अन्य स्थान पर कार्य करना स्वीकार्य नहीं होगा।सभी कर्मचारियों को अपनी मूल पदस्थ संस्था में उपस्थित रहकर वहीं से ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी।
शासन के निर्देशों के पालन पर जोर-
डीईओ ने अपने आदेश में लोक शिक्षण संचालनालय के पूर्व निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि संलग्नीकरण समाप्त होने के बाद भी यदि कर्मचारी मूल संस्था में उपस्थित नहीं होते हैं, तो यह शासन के निर्देशों और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
प्रशासनिक व्यवस्था में माना जा रहा बड़ा बदलाव-
शिक्षा विभाग में इस आदेश को वर्षों से चली आ रही अनौपचारिक ‘व्यवस्था’ पर निर्णायक प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे स्कूलों और मूल कार्यालयों में कर्मचारियों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित होगी तथा कार्यालयीन कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही बीईओ कार्यालयों में व्यवस्था के नाम पर चल रही कार्यप्रणाली पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।