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Aaj24.in Exclusive: छत्तीसगढ़ के जंगलों से आई बड़ी खुशखबरी! बारनवापारा में दिखी दुर्लभ ‘विशाल भारतीय गिलहरी’,,,

Priyanshu Ranjan

रायपुर/बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ के जंगलों से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए एक बेहद सुखद और बड़ी खबर सामने आई है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत आने वाले बारनवापारा क्षेत्र के देवपुर जंगल में एक अत्यंत दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (Malabar Giant Squirrel) देखी गई है। इस दुर्लभ वन्यजीव की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया है कि छत्तीसगढ़ का वन पारिस्थितिकी तंत्र बेहद समृद्ध और सुरक्षित हो रहा है।

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इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रदेश के वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने वन विभाग की टीम और प्रकृति प्रेमियों को बधाई दी है।

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देवपुर समर कैंप 2026 में हुआ ‘चमत्कार’

बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा हाल ही में 16 मई से 22 मई 2026 तक ‘देवपुर समर कैंप’ का आयोजन किया गया था। कैंप के पहले ही दिन यानी 16 मई को जब बच्चों और विशेषज्ञों का दल ‘बर्डिंग ट्रेल’ (पक्षियों को देखने) पर निकला था, तभी पेड़ की ऊंची शाखाओं पर इस विशाल गिलहरी ने दर्शन दिए।

किसने की पहचान?

इस दुर्लभ वन्यजीव की पहचान कैंप में शामिल प्रकृति प्रेमी और साइबर रिस्क एक्सपर्ट श्री हेमंत वर्मा ने की। अचानक सामने आई इस खूबसूरत गिलहरी को देखकर कैंप में शामिल बच्चों और वैज्ञानिकों का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच गया।

क्यों खास है यह ‘जायंट मालाबार स्क्विरल’?

वैज्ञानिक नाम: इसका वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका (Ratufa indica) है।

आकार में विशाल: यह भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। पूंछ को मिलाकर इसकी लंबाई लगभग 3 फीट तक होती है।

आकर्षक रंग: इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का एक बेहद खूबसूरत और कुदरती मिश्रण होता है।

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पेड़ों पर ही जिंदगी: यह अपना 90% से ज्यादा जीवन पेड़ों की ऊंची टहनियों पर ही बिताती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर लंबी छलांग लगाने में माहिर होती. है।

वन्यजीव अधिनियम की अनुसूची-2 में है शामिल (कानूनी संरक्षण)

यह गिलहरी कोई आम जीव नहीं है, बल्कि इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत कड़ा कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इसका शिकार करना या इसे नुकसान पहुंचाना एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है।

“बारनवापारा अभ्यारण्य और देवपुर का वन क्षेत्र जैव विविधता के मामले में बेहद समृद्ध है। इस दुर्लभ गिलहरी का यहां दिखना इस बात का सीधा प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ के जंगल अब वन्यजीवों के लिए अधिक सुरक्षित और अनुकूल हो चुके हैं।”

— श्री धम्मशील गणवीर, वनमंडलाधिकारी (DFO)

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी कामयाबी

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह सरकार द्वारा वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन के लिए चलाए जा रहे प्रभावी कदमों का ही नतीजा है। देवपुर समर कैंप जैसे आयोजनों से न सिर्फ नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति प्यार बढ़ रहा है, बल्कि ऐसे दुर्लभ जीवों का सामने आना राज्य के इको-टूरिज्म के लिए भी एक बेहतरीन संकेत है।

छत्तीसगढ़ के माथे पर जैव विविधता का यह नया मुकुट यकीनन प्रदेश को देश के नक्शे पर एक नई पहचान देगा।

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