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अंबिकापुर में राम मंदिर रोड पटाखा-प्लास्टिक गोदाम आग: सुरक्षा लापरवाही और अवैध संचालन के आरोप, कलेक्टर ने गठित की जांच टीम, शहर से बाहर शिफ्ट करने के निर्देश

Priyanshu Ranjan

अंबिकापुर, 25 अप्रैल 2026— छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में राम मंदिर रोड स्थित मुकेश प्लास्टिक एवं पटाखा दुकान/गोदाम में 23 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे लगी भीषण आग अब प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का बड़ा मामला बन गया है। आग गैस वेल्डिंग सिलेंडर ब्लास्ट या चिंगारी से शुरू हुई बताई जा रही है, जिससे प्लास्टिक और बचे हुए पटाखों के कारण लगातार धमाके हुए। आग पर काबू पाने में 8 से 18 घंटे लगे, जिसमें 30 से ज्यादा फायर टेंडर और लाखों लीटर पानी इस्तेमाल हुआ। इलाके की संकरी गलियों और रिहायशी इलाके में होने से बड़ा खतरा टला, लेकिन आसपास के 8-19 घरों को खाली कराया गया।

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क्या है पूरा मामला?

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राम मंदिर रोड की संकरी गली में मुकेश प्लास्टिक एजेंसी नाम से प्लास्टिक के थोक सामान के साथ पटाखों का भंडारण भी हो रहा था। आग लगने पर पटाखे फटने से धमाकों की आवाज पूरे इलाके में गूंजी, जिससे स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेज फैली कि दो मंजिला बिल्डिंग जलकर राख हो गई। फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन 36 घंटे बाद भी कुछ हिस्सों में धुआं और लपटें दिख रही थीं। किसी की जान नहीं गई, लेकिन लाखों रुपये का सामान जलकर खाक हो गया।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के आरोप

घटना के तुरंत बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया कि:

– गोदाम बिना वैध अनुमति या लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रहा था।

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रिहायशी क्षेत्र में ज्वलनशील पटाखे और प्लास्टिक का भंडारण सुरक्षा मानकों की पूरी अनदेखी था।

– पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।

शिकायतकर्ताओं ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और विस्फोटक अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासन की कार्रवाई

कलेक्टर अजीत वसंत ने मामले को गंभीरता से लिया और संयुक्त जांच दल का गठन किया। दल में शामिल हैं:

अनुविभागीय दंडाधिकारी, अंबिकापुर

– नगर पुलिस अधीक्षक, अंबिकापुर

– क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला प्रतिनिधि

– जिला नगर सेना और नगर पालिक निगम के कार्यपालन अभियंता

जांच दल को 7 दिनों के अंदर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में आग के कारण, सुरक्षा उल्लंघन और प्रशासनिक निगरानी की कमी की जांच होगी।

इसके अलावा, कलेक्टर ने सभी पटाखा गोदामों को शहर से बाहर शिफ्ट करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। अंबिकापुर में कुल 8 स्थायी पटाखा लाइसेंसधारी और 2 निर्माण लाइसेंसधारी संचालित हैं (जिनमें मुकेश कुमार अग्रवाल, सतीश कुमार जैन, विनोद कुमार जैन आदि शामिल)। अनुविभागीय दंडाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि सभी गोदामों का निरीक्षण कर जांच करें:

1. क्या गोदाम रिहायशी क्षेत्र में हैं?

2. अग्निशमन वाहन पहुंचने के लिए पर्याप्त मार्ग है?

3. लाइसेंस की शर्तों का पालन हो रहा है?

4. अवैध भंडारण पाए जाने पर तुरंत स्थानांतरण और वैधानिक कार्रवाई।

बड़ा खतरा टला, लेकिन सबक?

यदि आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जाता तो पटाखों के बड़े स्टॉक के कारण विस्फोट का खतरा और भी गंभीर हो सकता था। घटना ने रिहायशी इलाकों में ज्वलनशील सामग्री भंडारण की खतरनाक प्रथा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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लगातार इस मामले पर नजर रखे हुए है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और पटाखा गोदामों का शिफ्टिंग कितनी जल्दी होता है, इसे लेकर अपडेट जारी रहेंगे।

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यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध संचालन कितने बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। प्रशासन को अब ठोस कदम उठाकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना होगा।

 

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