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महान-03 खदान के भूमि अधिग्रहण व मुआवजे को लेकर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल एवं जिला प्रशासन व एसईसीएल अधिकारियों की बैठक रही बेनतीजा, आंदोलन रहेगा जारी,

Priyanshu Ranjan

सूरजपुर । जिले के प्रतापपुर क्षेत्र में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की महान-03 खदान और भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। खदान से प्रभावित ग्रामीणों और कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां उन्होंने जिला प्रशासन और एसईसीएल अधिकारियों के साथ बैठक कर अपनी समस्याएं रखीं।

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10 घंटे तक ठप रहा कोयला परिवहन-

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      इससे पहले ग्रामीणों और कांग्रेस नेताओं ने खदान क्षेत्र में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान कोयला परिवहन करीब 10 घंटे तक बंद रहा, जिससे खदान संचालन प्रभावित हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन और एसईसीएल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की।

बुलडोजर कार्रवाई से भड़का आक्रोश-

        विवाद की शुरुआत उस घटना से हुई, जब प्रतापपुर क्षेत्र के जगन्नाथपुर गांव में पूर्व जिला पंचायत सदस्य मंजू मिंज के पैतृक मकान पर रात के समय बुलडोजर चलाने का आरोप लगा। ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के मकान को तोड़ दिया गया, जिससे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया।

एसडीएम कार्यालय घेराव और खदान परिसर में प्रदर्शन

       घटना के विरोध में ग्रामीणों और कांग्रेस नेताओं ने एसडीएम कार्यालय का घेराव किया। इसके बाद खदान परिसर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने घंटों प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रशासन और एसईसीएल की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने रखी प्रमुख मांगें

      पूर्व अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में 10 गांवों के ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर और एसईसीएल के महाप्रबंधक के साथ विस्तृत चर्चा की।

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     ग्रामीणों की प्रमुख मांगें इस प्रकार रहीं- खदान क्षेत्र में आने वाली जमीन का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए, भूमि अधिग्रहण से संबंधित सभी दस्तावेज पारदर्शी तरीके से साझा किए जाएं, प्रभावित गांवों में विधिवत ग्राम सभा आयोजित की जाए।

पेसा कानून के उल्लंघन का आरोप

      ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची में आता है, जहां पेसा कानून लागू है, इसके बावजूद अब तक ग्राम सभा नहीं कराई गई, जो नियमों का उल्लंघन है।

विकास के खिलाफ नहीं, पारदर्शिता जरूरी

     ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना है कि देश को कोयले की जरूरत है और वे इसका विरोध नहीं कर रहे, लेकिन पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कानून के अनुसार होनी चाहिए।

बैठक बेनतीजा, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

    बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल ने इसे बेनतीजा बताया। उनका कहना है कि जब तक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जाते, तब तक एसईसीएल को काम नहीं करने दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

प्रशासन का पक्षः बैठक शांतिपूर्ण रही

      जिला प्रशासन का कहना है कि ग्रामीणों की सभी समस्याओं और आपत्तियों से एसईसीएल प्रबंधन को अवगत करा दिया गया है, साथ ही संबंधित दस्तावेज साझा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन के अनुसार बैठक शांतिपूर्ण माहौल में हुई और फिलहाल किसी प्रकार का विवाद नहीं है।

इलाके में तनाव बरकरार

     हालांकि प्रशासन के दावों के बावजूद जमीन अधिग्रहण और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर इलाके का माहौल अब भी गर्म है, ग्रामीण अपनी मांगों पर कार्रवाई और न्याय की उम्मीद में आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

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