अंबिकापुर। बिशुनपुर स्थित ‘प्लेस ऑफ सेफ्टी’ (बाल सुधार गृह) से सोमवार रात 15 अपचारी किशोर दीवार फांदकर फरार हो गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 5 को पकड़ लिया है, जबकि 2 किशोर स्वयं वापस लौट आए। फिलहाल 8 किशोर अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
घटना कैसे हुई?
रात करीब 9 बजे भोजन के बाद किशोरों को कमरों में ले जाया जा रहा था। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात गार्ड को धक्का देकर कुछ किशोरों ने हमला किया और सामूहिक रूप से परिसर की दीवार फांदकर बाहर निकल गए। मौके पर तीन गार्ड तैनात थे, लेकिन 15 किशोर भागने में सफल रहे।
क्षमता से अधिक निरुद्धीकरण?
सूत्रों के अनुसार संस्थान की स्वीकृत क्षमता 25 है, जबकि अंदर 26 से लेकर 36 तक किशोर रखे जाने की चर्चा है। यदि यह सही है, तो क्षमता से अधिक निरुद्धीकरण और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
गंभीर मामलों के किशोर
यहां 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग के वे किशोर रखे जाते हैं जो हत्या, दुष्कर्म और लूट जैसे गंभीर अपराधों में निरुद्ध हैं। ऐसे में उच्च स्तरीय सुरक्षा, सक्रिय सीसीटीवी, अलार्म सिस्टम और नियमित जोखिम आकलन की अनिवार्यता पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
निगरानी और स्टाफिंग पर सवाल
तीन गार्ड बनाम 15 किशोर — क्या यह पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था थी? क्या गार्डों को संकट प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण का प्रशिक्षण मिला था? रात्रि पाली में अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू था या नहीं — इसकी भी जांच अपेक्षित है।
प्रबंधन और जवाबदेही
सूत्रों के हवाले से संस्थान की निगरानी व्यवस्था और नियमित उपस्थिति को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि शेष है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील संस्थानों में नियमित ऑडिट और आकस्मिक निरीक्षण आवश्यक हैं।
पुलिस कार्रवाई जारी
गांधीनगर थाना पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। जांच केवल फरार किशोरों की तलाश तक सीमित न रहकर सुरक्षा मानकों, स्टाफिंग, काउंसलिंग और जोखिम मूल्यांकन की स्थिति की भी समीक्षा करेगी।
बड़ा सवाल
जब ‘सुरक्षा का स्थान’ ही असुरक्षित साबित हो, तो यह केवल एक फरारी नहीं, बल्कि प्रणाली की परीक्षा है। अब देखना होगा कि इस घटना के बाद जवाबदेही तय होती है या यह मामला भी फाइलों तक सीमित रह जाता है।



