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2023 के चर्चित महिला मौत मामले में बड़ा फैसला: सूरजपुर अपर सत्र न्यायालय ने आरोपी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा, हत्या नहीं गैर-इरादतन हत्या माना अपराध

Bharat Sharma

सूरजपुर: जिले के वर्ष 2023 के बहुचर्चित महिला मृत्यु प्रकरण में माननीय अपर एवं सत्र न्यायालय (एफटीसी) सूरजपुर ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने मामले को हत्या नहीं बल्कि गैर-इरादतन हत्या मानते हुए आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास तथा 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार 20 जनवरी 2023 को कॉलेज रोड, सूरजपुर निवासी बबिता ने थाना सूरजपुर में सूचना दी थी कि वह सुबह धनरासो उर्फ निशा सिंह के घर सुपा मांगने गई थी। घर के बाहर आवाज देने पर कोई जवाब नहीं मिला, जिसके बाद वह अंदर गई। किचन कमरे में कंबल से ढकी महिला मिली। कंबल हटाने पर महिला मृत अवस्था में पाई गई, जबकि उसका पति रामरतन देवांगन घर पर मौजूद नहीं था।

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हत्या का मामला दर्ज, बाद में बदली गई धारा

घटना की सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर अपराध क्रमांक 39/2023 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के अंतर्गत मामला दर्ज किया। जांच के दौरान आरोपी रामरतन देवांगन (30 वर्ष), निवासी ग्राम सुरता छातापारा, थाना रामानुजनगर को गिरफ्तार किया गया। मामले की विवेचना तत्कालीन विवेचक एसआई दिनेश राजवाड़े द्वारा की गई, जिन्होंने साक्ष्य संकलित कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।

न्यायालय का महत्वपूर्ण निष्कर्ष

प्रकरण की सुनवाई माननीय अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) श्री मानवेन्द्र सिंह की अदालत में हुई। न्यायालय ने सभी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, गवाहों के बयान और मृतिका के शरीर पर आई चोटों के स्वरूप का गहन परीक्षण करते हुए यह पाया कि यह मामला हत्या (धारा 302) का नहीं बल्कि गैर-इरादतन हत्या (धारा 304 भाग-1) का है।

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10 साल की सजा, तीन साल बाद न्यायिक पटाक्षेप

दिनांक 31 जनवरी 2026 को सुनाए गए निर्णय में न्यायालय ने आरोपी को धारा 304 (प्रथम भाग) के तहत दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान रखा गया है।

करीब तीन वर्षों तक चले इस चर्चित प्रकरण में आए इस फैसले के साथ न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को आधार मानते हुए आरोपी को दोषी ठहराया, जिससे मामले का कानूनी रूप से पटाक्षेप हो गया।

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