केरल सरकार ने 2026-27 के बजट में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सरकारी और सरकारी-सहायता प्राप्त कॉलेजों में कला और विज्ञान के ग्रेजुएशन कोर्स पूरी तरह मुफ्त कर दिए हैं। यानी अब केरल में शिक्षा सिर्फ 12वीं तक नहीं, बल्कि डिग्री तक बिना ट्यूशन फीस के उपलब्ध होगी।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश के अधिकांश राज्यों में उच्च शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है और लाखों छात्र सिर्फ फीस के बोझ के कारण पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। केरल का यह कदम न सिर्फ शिक्षा के अधिकार को मजबूत करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो शिक्षा को मुनाफा नहीं, अधिकार बनाया जा सकता है।
जहां कई राज्य विश्वविद्यालयों को आत्मनिर्भरता के नाम पर छात्रों से मोटी फीस वसूलने में लगे हैं, वहीं केरल ने साफ संदेश दिया है कि गरीबी प्रतिभा की दुश्मन नहीं बननी चाहिए। यह फैसला सामाजिक न्याय, समान अवसर और संवैधानिक मूल्यों की जीवंत मिसाल है।
अब सवाल बाकी राज्यों से है —
क्या वे शिक्षा को सिर्फ घोषणाओं और नारों तक सीमित रखेंगे,
या केरल मॉडल से सीख लेकर छात्र-हित में ठोस फैसले लेंगे?
केरल ने रास्ता दिखा दिया है, अब बारी बाकी राज्यों की है।
