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विभाग की कानाफुंसी ; आशिक आवारा में श्रद्धा रखने वाले को मिलता है प्रसाद,बाकी के बिगड़ते हैं आसार।

Priyanshu Ranjan

जिला ब्यूरो की रिपोर्ट 

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रतलाम/विगत कुछ अंकों से आप पढ़ रहे हैं आशिक आवारा के कारनामे जैसा कि इतने अंकों में पढ़ने के बाद आपको विदित है कि आशिक आवारा किस तरह से अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को परेशान करता है तथा और किस तरह अपने आप को सबसे सुपर मानता है ऐसा ही कुछ वाक्य महाकाल की नगरी का है वहां पर भी आशिक आवारा जी ने अपने रंग बिखेरे है जहां एक और दी – नेस के आर को ओर जी के नेंद्रा सूरी को जबरन प्रशासन के पैसे का दुरुपयोग कर मुख्यालय पर बुलाया वही आशिक आवारा जी में श्रद्धा ना दिखाने पर एक कर्मचारी को महाकाल की नगरी में परेशान किया जा रहा है जबकि वह कर्मचारी बिना किसी खर्चे के आना चाहता है पर नहीं आने दिया जा रहा ओर फिर आ भी कैसे जाए आशिक आवारा जी जो की सबसे ज्यादा अपने आप को बुद्धिमान जो मानते हैं जबकि इस समय उनकी बुद्धि सिर्फ लोगों को परेशान करने में लगी हुई है
कुल मिलाकर बात यह है की, उतना ही सितम किसी पर करो जितना खुद बर्दाश्त कर सको।
आशिक आवारा ज्यादा जुर्म मत करो सबको खुदा के पास जाना है ना हाथी है ना घोड़ा है वहां पैदल ही जाना है

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टिंकू जी और लंबू जी खेल रहे हैं अपनी पारी किसी न किसी तरीके से दोनों की जी एम एच जारी

काले कोटवालों के ऑफिस में भी चैन नहीं है जहां जो लोग गाड़ियां चेक करते हैं उन्हें लंबू जी चैन नहीं लगने देते क्योंकि लंबू जी इस विभाग के बहुत बड़े नारद है कोई उनके जरा सा विरुद्ध चला के वह आशिक आवारा को तुरंत सूचना देते हैं और आशिक आवारा फिराक में बैठे रहते हैं की कब कर्मचारी को परेशान किया जाए और उधर टिंगू जी भी अपनी शोक लहर से बाहर आ गए हैं थोड़े दिन तो आने के बाद वह अपने आप को गंभीर और मातृभक्त बताते हुए संवेदना बटोर रहे थे पर अब जैसे ही कुछ दिन बीत गए टिंगू जी शौक भी भूल गए और लग गए फिर से गाड़ी बदलने के नाम पर परेशान करने में हालांकि लंबू और टिंगू जी दोनों अपने आपको ईमानदार तो साबित करते हैं पर वह यह भूल जाते हैं कि उन्होंने जो अपने-अपने 8 -10 गुर्गे जी एम एच के लिए रखे हुए हैं उसकी खबर सब को है, रतलाम रेलवे स्टेशन से कुछ ही दूरी पर स्वच्छ शहर से आए काले कोट वालों ने एक आश्रम (कमरा) लिया हुआ है उस में दोनों आश्रय लेते है जिसमें की टिंगू जी ओर आशिक आवारा सोम रस का पान कर लेते हैं और बदले में उन सभी पर कृपा कर देते है।

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लंबू जी और टिंकू जी आशिक आवारा की शह पर कर रहे जी एम एच चुपके-चुपके, पर पूरे विभाग को हो रही खबर जमके जमके

विभाग में थोड़ी बंटेगी मिठाई टिंगू जी की हुई कुटाई ,जंग अभी जारी है अब आशिक आवारा की बारी है

तो आखिरकार सप्ताह के शुरुआत में अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को त्रस्त करने वाले, आशिक आवारा की शह पर काले कोटवाले को सताने वाले टिंगू जी की कुटाई हो गई यह कोई आम बात नहीं है कि टिंगू जी की पहली बार कुटाई हुई हो इससे पहले भी कई बार टिंगू जी कुटाई खा चुके हैं, चलती ट्रेन में भी टिंगू जी ने कुटाई खाई है वह बात अलग है कि जिससे ये जूते खाते हैं उनके खास हो जाते हैं अब तो सब इंतजार कर रहे हैं कि ऐसा ही मामला आशिक आवारा के साथ कब हो वैसे इसकी बात अब बहुत सारे अखाड़े में है बस कब अखाड़े के पहलवान आशिक आवारा के साथ कुश्ती लड़े इस बात का इंतजार है पर फिलहाल मामला कुछ भी हुआ हो लेकिन इस बात से काले कोट वाले बहुत खुश है कि किसी ने तो त्रस्त होकर आवाज उठाई यह अपने आप में पहला मामला है जब काले कोट वाले की ड्यूटी लगाने वाले कि किसी अधीनस्थ कर्मचारियों ने कुटाई की हो जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करके आप छोटे कर्मचारियों को परेशान करोगे तो मामला यही होगा मालवा में कहावत है
इस जन्म के कर्म इस जन्म में ही भोगने है

पर अब समय आ गया है कि इस विभाग की प्रमुख जी को इन पर अति विश्वास ना करते हुए कुछ निर्णय लेना चाहिए अभी तो यह छोटी सी चिंगारी है कहीं आग का रूप ना ले ले इस विभाग की प्रमुख सीधे चुनकर और बड़ी परीक्षा पास करके यहां तक आते हैं और इस तरह के लोगों को अगर नहीं पहचान पाए तो फिर क्या मतलब है जल्द ही विभाग प्रमुख जी को ऐसी दीमक को निकाल कर फेंकना चाहिए।

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अपने मुंह मियां मिट्ठू बनते है आशिक आवारा, जाने किस घमंड में चढ़ाए रखते है पारा ।

जब से आशिक आवारा जी आए हैं तब से हालांकि टारगेट कोई बहुत ज्यादा नहीं हो रहा उतना ही होता है जितना की पिछले बाबू सब के समय होता था पर आजकल आशिक आवारा जी अपने मुंह मियां मिट्ठू बनते हैं
इतना दिखावा तो पिछले वाले बाबू ने रतलाम मंडल को 2 बार टिकट चेकिंग शील्ड दिलवाने ओर 3 बार रतलाम मंडल को दूसरे स्थान पर लाने पर भी नहीं किया, जितना दिखावा आशिक आवारा और इनके चमचों ने 1 महीने के काम में दिखावा कर दिया।
मई महीने तो वैसे भी बच्चों की छुट्टियां और शादियों का सीजन होता है, यानि कि पीक सीजन, तो इसमें आय अर्जित करना कोई बड़ी बात नहीं, कोई नौसिखिया भी कर लेगा। बात तो तब है जब जुलाई महीने में लीन सीजन मे इस प्रकार से आए अर्जित करके बताए। पर अपने आप को सुपर से ऊपर साबित करने में लगे आशिक आवारा जी यह भूल जाते हैं कि वह कुछ भी करें लोग आंखों पर पट्टी बांधकर नहीं बैठे जिस दिन समय आएगा हिसाब बराबर हो जाएगा।
एक कहावत है सच्चा सौ दिन झूठ 9 दिन

अगले अंक में

किस तरह विभाग की महिला कर्मचारी परेशान
और इसी बात में आशिक आवारा समझते हैं अपनी शान।

किस तरह टिंगू जी और लंबू जी कागजों पर करते है खेल, उन कागजों को सही बताकर आशिक आवारा करते सबको फैल।

आशिक आवारा किस तरह कर रहे सरकार के पैसे का दुरुपयोग अगले अंक में।

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