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सूरजपुर के रेवटी जंगल में बाघ की संदिग्ध मौत, धारदार हथियार मिलने से शिकार व तस्करी की आशंका, जांच में जुटा वन विभाग…

सूरजपुर के रेवटी क्षेत्र में जंगल से बाघ का शव संदिग्ध हालत में मिला। धारदार हथियार और नाखून गायब होने से शिकार व तस्करी की आशंका, जांच में वन विभाग।

Bharat Sharma

सूरजपुर। जिले के घुई वन परिक्षेत्र अंतर्गत भैसामुंडा सर्किल के रेवटी क्षेत्र में एक बाघ का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से वन विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। जंगल के भीतर मिले शव पर गहरी चोटों के निशान पाए गए हैं, जबकि एक नाखून गायब बताया जा रहा है। घटनास्थल के पास लोहे का धारदार हथियार भी बरामद हुआ है, जो भाले जैसा प्रतीत होता है। इन तथ्यों ने बाघ के शिकार कर तस्करी किए जाने की आशंका को और गहरा कर दिया है

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बाघ की मौत करीब तीन से चार दिन पहले हो चुकी थी। इतने दिनों तक शव का जंगल में पड़े रहना वन विभाग की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रेवटी क्षेत्र को संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र माना जाता है, जहां कैमरा ट्रैप और नियमित पेट्रोलिंग के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन इस घटना ने इन दावों की पोल खोल दी है।

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स्थानीय ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जंगल में वन अमले की मौजूदगी बेहद सीमित रहती है। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि घटना से पहले जंगल से संदिग्ध आवाजें भी सुनाई दी थीं, जिसकी सूचना दी गई थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजी निगरानी और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है।

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वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघ की मौत प्राकृतिक नहीं लगती। शरीर पर मिले घाव और नाखून का गायब होना शिकार व तस्करी की ओर इशारा करता है। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. रामेश्वर पटेल के अनुसार, यह मामला प्रायोजित शिकार का हो सकता है और डीएनए टेस्ट व फॉरेंसिक जांच बेहद जरूरी है।

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घटना की जानकारी मिलते ही बलरामपुर और सूरजपुर वन मंडल के डीएफओ सहित संयुक्त वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। बाघ के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो को भी मामले से अवगत करा दिया गया है।

गौरतलब है कि बीते कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ में बाघों की संदिग्ध मौतों के कई मामले सामने आ चुके हैं। वन विभाग के बजट में बढ़ोतरी के बावजूद संरक्षण व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस बार जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी और दोषियों तक कार्रवाई पहुंचेगी।

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