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प्रभार के भरोसे सूरजपुर का कृषि विभाग! वर्षों से खाली अहम पद, किसानों की सेवाओं पर उठे सवाल

Priyanshu Ranjan

सूरजपुर। किसानों की आय बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने और सरकारी कृषि योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालने वाला कृषि विभाग इन दिनों बड़ी संख्या में रिक्त पदों और अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था से जूझ रहा है। विभागीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त बताए जा रहे हैं, जबकि जिला और विकासखंड स्तर पर भी अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपकर कामकाज चलाने की स्थिति सामने आ रही है।

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विभागीय व्यवस्था के अनुसार अपर संचालक के 8, संयुक्त संचालक के 4 और उप संचालक के 6 पद रिक्त बताए जा रहे हैं। वहीं मैदानी स्तर पर कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के करीब 280 पद खाली होने की बात सामने आई है।

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इतनी बड़ी संख्या में पद रिक्त होने के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब विभाग में पदोन्नति के पात्र अधिकारी उपलब्ध बताए जा रहे हैं और महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं, तो नियमित पदस्थापना के बजाय प्रभार व्यवस्था कब तक जारी रहेगी?

जिला कृषि अधिकारियों के पद भी प्रभार में

रिक्तियों का असर केवल विभागीय मुख्यालय तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक जिलों में जिला कृषि अधिकारी के पद प्रभार के भरोसे संचालित होने की बात सामने आई है। इसके अलावा कई जिला और विकासखंड कार्यालयों में भी अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।

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एक अधिकारी के पास मूल दायित्व के साथ अतिरिक्त प्रभार होने की स्थिति में विभागीय योजनाओं की निगरानी, मैदानी निरीक्षण, किसानों की शिकायतों का निराकरण और योजनाओं की समीक्षा जैसे काम प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।

खाद-बीज और कीटनाशकों की गुणवत्ता जांच भी अहम

कृषि विभाग की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में खाद, बीज और कीटनाशकों की गुणवत्ता की जांच भी शामिल है। बाजार से नमूने लेना, उनका परीक्षण कराना और अमानक पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करना किसानों के हित से सीधे जुड़ा विषय है।

ऐसे में यदि मैदानी स्तर पर पर्याप्त अधिकारी और प्रयोगशालाओं में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध नहीं हों तो पूरी गुणवत्ता जांच प्रक्रिया की गति और प्रभावशीलता पर असर पड़ने की आशंका रहती है।

8 आधुनिक प्रयोगशालाओं में भी मानव संसाधन की चुनौती

कृषि आदानों की गुणवत्ता जांच के लिए प्रदेश में स्थापित 8 आधुनिक प्रयोगशालाओं में विश्लेषकों की कमी होने की बात भी सामने आ रही है। भवन, मशीनरी और अन्य संसाधनों पर खर्च के बावजूद पर्याप्त प्रशिक्षित अधिकारी एवं विश्लेषक उपलब्ध नहीं होने पर प्रयोगशालाओं की क्षमता का पूरा उपयोग सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

पदोन्नति और नियमित नियुक्ति की मांग

कृषि विभाग में लंबे समय से चली आ रही रिक्तियों और प्रभार व्यवस्था के बीच अब पदोन्नति के पात्र अधिकारियों को समय पर पदोन्नति देने, रिक्त पदों को भरने और जिला-विकासखंड स्तर पर नियमित अधिकारियों की पदस्थापना की मांग उठ रही है।

कृषि क्षेत्र बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़ा है। ऐसे में विभाग में पर्याप्त मानव संसाधन और स्पष्ट जिम्मेदारी वाली नियमित प्रशासनिक व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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अब निगाह इस बात पर है कि शासन स्तर पर रिक्त पदों और लंबे समय से चली आ रही प्रभार व्यवस्था को लेकर कब ठोस निर्णय लिया जाता है।

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