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33.10 करोड़ की सड़क कुछ महीनों में उखड़ने लगी, कुसमी-सामरी मार्ग की गुणवत्ता पर सवाल; AAP ने मांगी जांच

Priyanshu Ranjan

निर्माण के 4-6 महीने बाद खराब हिस्सों को जेसीबी से खोदकर कराया जा रहा सुधार, गुणवत्ता परीक्षण और विभागीय निगरानी पर उठे सवाल

अंबिकापुर। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई सड़क यदि निर्माण के कुछ ही महीनों बाद क्षतिग्रस्त होने लगे तो निर्माण की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। कुसमी-सामरी मार्ग पर सामने आई ऐसी ही स्थिति को लेकर अब जांच की मांग उठने लगी है।

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लोक निर्माण विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार कुसमी-सामरी मार्ग के 16.60 किलोमीटर हिस्से के उन्नयन एवं मजबूतीकरण पर 33.10 करोड़ रुपये की लागत से कार्य कराया जा रहा है। लेकिन निर्माण के कुछ ही महीनों बाद मार्ग के कई हिस्सों में सड़क की ऊपरी परत उखड़ने, सड़क क्षतिग्रस्त होने और गड्ढे बनने की स्थिति सामने आई है।

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नई सड़क के खराब हिस्से को जेसीबी से दोबारा खोदा जा रहा

मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आ रही है कि सड़क के जिन हिस्सों में निर्माण के बाद खराबी दिखाई दी है, वहां अब जेसीबी मशीन से सड़क को दोबारा खोदकर सुधार कार्य कराया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक खराब हिस्सों में पीसीसी कार्य कराया जा रहा है।

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यदि सड़क निर्माण के महज 4 से 6 महीने के भीतर ही उसके कुछ हिस्सों को दोबारा खोदकर सुधारना पड़ रहा है, तो यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण और तकनीकी निगरानी किस स्तर पर की गई थी।

हालांकि, सड़क खराब होने के वास्तविक कारण का पता तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा। केवल सड़क की मौजूदा स्थिति के आधार पर घटिया निर्माण या भ्रष्टाचार का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

बारिश के बाद सामने आई सड़क की खराब स्थिति

बारिश के बाद मार्ग के कुछ हिस्सों में सड़क की ऊपरी परत उखड़ने, धंसने और गड्ढे बनने की स्थिति सामने आने की बात कही जा रही है। स्थानीय स्तर पर इसे लेकर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

सड़क खराब होने के पीछे जल निकासी की समस्या, आधार परत की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री, सड़क निर्माण की तकनीकी प्रक्रिया अथवा अन्य कारण हो सकते हैं। इसलिए वास्तविक स्थिति जानने के लिए विशेषज्ञों से तकनीकी परीक्षण कराना जरूरी होगा।

मरम्मत से पहले यह पता चलना जरूरी कि सड़क खराब क्यों हुई

खराब हिस्से को जेसीबी से खोदकर दोबारा निर्माण करना तत्काल समाधान हो सकता है, लेकिन इससे सड़क खराब होने का मूल कारण सामने नहीं आता।

ऐसे में जांच के दौरान इन बिंदुओं को देखा जाना जरूरी है—

  • सड़क निर्माण में निर्धारित तकनीकी मापदंडों का पालन हुआ या नहीं?
  • आधार परत और ऊपरी परत की गुणवत्ता की जांच की गई थी या नहीं?
  • निर्माण में इस्तेमाल सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं?
  • निर्माण के दौरान विभागीय इंजीनियरों ने गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की?
  • सड़क निर्माण के बाद आवश्यक गुणवत्ता परीक्षण कराए गए थे या नहीं?
  • बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हिस्सों की विभागीय तकनीकी जांच कराई गई या नहीं?
  • यदि तकनीकी खामी सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
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33.10 करोड़ रुपये की लागत वाले सार्वजनिक निर्माण कार्य को देखते हुए इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।

विभागीय अधिकारी का पक्ष नहीं मिल सका

सड़क के खराब होने, जेसीबी से क्षतिग्रस्त हिस्सों को खोदकर सुधार कार्य कराए जाने और विभागीय जांच के संबंध में लोक निर्माण विभाग के संबंधित एसडीओ ज्योतिष तिग्गा का पक्ष जानने के लिए मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

विभागीय अधिकारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

AAP ने की निष्पक्ष जांच की मांग

मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के संगठन मंत्री शकील ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सड़क यदि कुछ ही महीनों में खराब होने लगे और उसके हिस्सों को दोबारा खोदकर सुधारना पड़े तो निर्माण की गुणवत्ता की जांच जरूरी है।

उन्होंने सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, तकनीकी गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की जांच कराने तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

शकील ने कहा कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन द्वारा आंदोलन और विभाग के घेराव की चेतावनी दी गई है।

अब निगाह तकनीकी जांच पर

फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि सड़क के क्षतिग्रस्त होने की वजह क्या है। क्या यह बारिश, जल निकासी या किसी अन्य तकनीकी कारण से हुआ है, या निर्माण प्रक्रिया में कहीं कमी रही है—इसका जवाब निष्पक्ष तकनीकी जांच से ही सामने आएगा।

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करोड़ों रुपये की लागत से बने इस मार्ग में यदि निर्माण के कुछ महीनों बाद ही बड़े स्तर पर सुधार की आवश्यकता पड़ रही है, तो संबंधित विभाग के लिए सड़क की गुणवत्ता का परीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करना जरूरी हो जाता है।

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