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सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत तिलस्वा व पचिरा में खुलेआम हो रही है नीलगिरी लकड़ी की अवैध कटाई, परिवहन और भंडारण

Bharat Sharma

वन विभाग व राजस्व विभाग की कार्यवाही नदारद

सूरजपुर । जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत तिलस्वा और पचिरा क्षेत्र में नीलगिरी लकड़ी की अवैध कटाई, परिवहन और भंडारण का कारोबार खुलेआम जारी है। दिन-रात ट्रैक्टरों के जरिए लकड़ी ढोई जा रही है, लेकिन वन विभाग और राजस्व अमले की ओर से प्रभावी कार्रवाई नदारद है। हालात यह हैं कि ग्रामीणों की शिकायतों और स्पष्ट सूचना के बावजूद अवैध भंडारण स्थलों पर न तो जांच हो रही है और न ही जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंच रहे हैं।

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स्थानीय सूत्रों के अनुसार पचिरा में भारी मात्रा में नीलगिरी लकड़ी का अवैध भंडारण किया गया है। कई बार सूचना देने के बाद भी कार्रवाई न होना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि लकड़ी तस्करों को संरक्षण प्राप्त है, इसी कारण वे बस्तियों और मुख्य मार्गों से रस्सियों के सहारे लकड़ी लादकर बेखौफ गुजरते हैं। यह न केवल कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

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सबसे गंभीर आरोप ट्रैक्टर जब्ती और रिहाई को लेकर सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि अवैध लकड़ी से भरे ट्रैक्टरों को जब्त तो किया जाता है, लेकिन एक-दो दिन के भीतर मामूली चालान पर छोड़ दिया जाता है। हाल ही में रिंग रोड पर सूचना के बाद लकड़ी माफिया द्वारा ट्रैक्टर का इंजन काटकर ले जाने और ट्रॉली छोड़ देने का मामला भी सामने आया, परंतु मौके पर पहुंचे राजस्व अधिकारी ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

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इसके अगले ही दिन जब्त ट्रैक्टर रिहा कर दिया गया

ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब बालू तस्करी में पकड़े गए ट्रैक्टरों को महीनों तक खड़ा रखा जाता है और भारी जुर्माना लगाया जाता है, तो लकड़ी तस्करी में इतनी नरमी क्यों? बालू मामलों में दस हजार रुपये से अधिक का चालान आम बात है, जबकि लकड़ी तस्करी में मामूली कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है। क्या विभाग पर किसी प्रभावशाली व्यक्ति का दबाव है, या फिर यह सब मिलीभगत का परिणाम है?

पूर्व में वन एवं राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त कार्रवाई की गई थी, लेकिन उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अवैध भंडारण की स्पष्ट जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़ा करता है। यदि यही स्थिति बनी रही तो जिले की वन संपदा का तेज़ी से क्षरण होगा और कानून व्यवस्था पर जनता का भरोसा पूरी तरह डगमगा जाएगा।

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं

क्या अवैध कटाई, परिवहन और भंडारण में शामिल लोगों पर निष्पक्ष व कठोर कार्रवाई होगी या फिर संरक्षण के साए में यह अवैध कारोबार यूं ही फलता-फूलता रहेगा?

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